लखनऊ : लखनऊ में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए प्रदेश विधानमंडल का विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को बुलाने की मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद अब विधानसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन पर विस्तृत चर्चा होने की राह साफ हो गई है।
कैबिनेट बाई सर्कुलेशन से मिली स्वीकृति
प्रदेश सरकार ने विशेष सत्र आहूत करने का प्रस्ताव कैबिनेट बाई सर्कुलेशन (परिपत्र के माध्यम से) के जरिए मंजूरी दी थी। इसके बाद प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा गया, जहां आनंदीबेन पटेल ने इसे तुरंत स्वीकृति प्रदान कर दी। यह प्रक्रिया सामान्य सत्रों से अलग है और जरूरी मुद्दों पर शीघ्र चर्चा के लिए अपनाई जाती है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन पर होगी बहस
विशेष सत्र का मुख्य एजेंडा नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) का संशोधन है। केंद्र में पास हुए इस ऐतिहासिक कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने और प्रदेश स्तर पर उसकी रूपरेखा तय करने के लिए यह चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भाजपा सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
विपक्षी दलों पर पहले ही साधा था निशाना
इस विशेष सत्र की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में भाजपा ने लखनऊ में ‘जन आक्रोश महिला पद यात्रा’ निकालकर विपक्ष को महिला आरक्षण विरोधी करार दिया था। कांग्रेस और सपा ने इसके जवाब में 2023 में विधेयक पास होने के बावजूद लागू न करने का आरोप लगाया था। अब विशेष सत्र में दोनों पक्ष अपनी बात रखेंगे।
विधानसभा सत्र की तैयारियां तेज
30 अप्रैल को होने वाले एक दिवसीय विशेष सत्र की तैयारियां जोरों पर हैं। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यों को सूचना भेज दी है। सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य समेत सभी प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे। विधेयक पर चर्चा के बाद प्रस्ताव पारित किए जाने की संभावना है।
महिला आरक्षण : 33 प्रतिशत सीटों का प्रावधान
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। यह आरक्षण परिसीमन (delimitation) के बाद लागू होगा। यूपी सरकार अब इसकी प्रदेश स्तर पर तैयारी और संशोधनों पर चर्चा करना चाहती है ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुद्दा पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
राज्यपाल का सक्रिय रुख
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रस्ताव पर त्वरित मंजूरी देकर अपनी संवैधानिक भूमिका का निर्वहन किया है। वे पहले भी महिला सशक्तिकरण और शिक्षा से जुड़े कई कार्यक्रमों में सक्रिय रहीं हैं। इस फैसले को महिला अधिकारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है।
सियासी गलियारों में चर्चा तेज
विशेष सत्र की घोषणा के बाद लखनऊ के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई है। भाजपा इसे अपनी महिला हितैषी छवि मजबूत करने का मौका बता रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी स्टंट करार दे सकता है। आने वाले दिनों में सभी पार्टियां अपनी रणनीति तैयार करेंगी।
यह विशेष सत्र उत्तर प्रदेश में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस को नई दिशा देगा। 30 अप्रैल को विधानसभा में होने वाली चर्चा का पूरे देश पर असर पड़ेगा, क्योंकि यूपी सबसे बड़ी विधानसभा वाला राज्य है।
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