सहजनवां से सूरज प्रताप सिंह की रिपोर्ट।सहजनवां नगर पंचायत क्षेत्र इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में स्थित बड़ी फैक्ट्रियां, जैसे गैलेंट इस्पात लिमिटेड और अंकुर उद्योग, भूजल का अत्यधिक दोहन कर रही हैं, जिससे पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है।
ग्रामीणों और नगरवासियों का कहना है कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों को पीने के पानी के लिए एक-दूसरे के घरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई परिवार ऐसे हैं जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वे लाखों रुपये खर्च कर समरसेबल पंप लगवा सकें।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि उद्योगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कुछ लोगों ने इसे “मुनाफे की अंधी दौड़” बताते हुए आरोप लगाया कि आम जनता की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
निवासियों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह संकट और भयावह रूप ले सकता है। उन्होंने इस मुद्दे को उच्च स्तर तक उठाने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
क्षेत्र युवा समाजसेवी पवन सिंह का कहना है कि प्रशासन हमारी सलाह माने तो इस समस्या से हमारे क्षेत्र को छुटकारा मिल सकता है।
यह किया जा सकता है –
समस्या का समाधान:
1️⃣ वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting)
हर घर और इमारत में अनिवार्य रूप से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए।
2️⃣ पुराने जल स्रोतों का पुनर्जीवन
कुएं, तालाब और पोखरों की सफाई, गहरीकरण और संरक्षण किया जाए।
3️⃣ भूजल दोहन पर नियंत्रण
सबमर्सिबल पंप के अनियंत्रित उपयोग पर नियम और निगरानी जरूरी है।
4️⃣ औद्योगिक प्रदूषण पर सख्ती
फैक्ट्रियों के अपशिष्ट को बिना ट्रीटमेंट के जमीन या पानी में जाने से रोका जाए।
5️⃣ हरियाली बढ़ाना
पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाने से जल स्तर को संतुलित रखने में मदद मिलती है।
6️⃣ जन जागरूकता अभियान
लोगों को पानी के महत्व और उसके संरक्षण के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
7️⃣ स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भूमिका
नगर पंचायत और प्रशासन को ठोस योजना बनाकर उसे सख्ती से लागू करना चाहिए।
अंत में…
यह सिर्फ एक व्यक्ति की याद नहीं, बल्कि पूरे सहजनवा की हकीकत है।
अगर अब भी नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।
“पानी है तो कल है… वरना सब शून्य है।”
संजय क्याल ( व्यवसाई) जिस तरह भूस्तर नीचे गिर रहा है यह हमारे कस्बे को एक दिन रेगिस्तान जैसा बना देगी, यदि समय रहते इस समस्या का हल नहीं निकला तो यह क्षेत्र इतिहास के पन्नो में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा।
रंगीलाल ( स्थानीय नागरिक) का कहना है कि यथा शीघ्र इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में हमे यहां से पलायन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।












