नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पहाड़गंज साइड रोजाना भयानक जाम लगता है, जिससे वहां से कार और थ्री व्हीलर तो छोड़िये बाइकें तक रेंगती हुई जाती हैं। इस जाम से निकलने में लोगों को सामान्य तौर पर 15-20 मिनट का समय लगता है। यही जाम यहां आने वाले यात्रियों के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। आलम यह है कि जाम में फंसकर कई यात्रियों की ट्रेन तक छूट जाती है। कई यात्री जाम में फंसने की वजह से बीच सड़क पर ही टैक्सी-ऑटो को छोड़कर ट्रेन पकड़ने के लिए भागते हुए दिखाई दिए।
इस मुसीबत वाले जाम की तह में जाने के बाद सामने आया कि स्टेशन के पहाड़गंज साइड में प्रवेश द्वार के बगल में लोगों के चलने के लिए जो फुटपाथ बने हैं, उनपर अवैध रेहड़ी वालों का कब्जा है। फुटपाथ पर रेहड़ी लगती है और इनके बगल में बीच सड़क पर ऑटो-टैक्सी खड़ी रहती हैं। इसके बाद सड़क पर जो जगह बचती है, उससे स्टेशन से निकलने वाले यात्री पैदल चलते हैं। इसकी वजह से सड़क पर एक लेन की जगह बचती है, जिससे यही अवैध कब्जा इस जाम को बढ़ा रहा है।
अवैध रेहड़ी वालों की संख्या 45 से 50 के बीच
इन रेहड़ी वालों में गुटखा, सिगरेट, पानी के साथ में खाने-पीने की ठेली शामिल हैं। रेहड़ी वालों की कुल संख्या 45 से 50 के बीच में है। स्टेशन परिसर में खड़े एक कुली ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि सड़क के किनारे जितने भी पान-गुटखा, बीड़ी-सिगरेट और पराठे की रेहड़ी लगाने वाले हैं, ये सभी रेहड़ी लगाने की एवज में दिल्ली नगर निगम (MCD) से लेकर दिल्ली पुलिस को पैसा देते हैं।

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NDMC के अधिकार क्षेत्र में आता है इलाका
दरअसल, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (पहाड़गंज) के बाहर का क्षेत्र उत्तरी दिल्ली नगर निगम, करोल बाग-जोन (NDMC) के अंतर्गत आता है। इसके अधिकार क्षेत्र में सड़कों के किनारे लगने वाली दुकानों से लेकर रेस्टोरेंट और दुकानें आती हैं। NDMC ही क्षेत्र में वैध और अवैध दुकानों को लगाने देने और शह देने के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में रेलवे स्टेशन के बाहर अवैध रेहड़ियों को लगने देना NDMC के काम करने के तरीके पर सवालिया निशान उठा रहा है। मगर, सबकुछ सबके सामने हो रहा है, आम लोगों से लेकर ट्रेन पकड़ने वाले यात्री इससे परेशान हो रहे हैं।
कार्रवाई करने के नाम पर खानापूर्ती
जिम्मेदार अधिकारी और NDMC के कर्मचारी कार्रवाई करने के नाम पर खानापूर्ती कर रहे हैं। एंट्री गेट के पास मौजूद एक दिल्ली पुलिस के जवान से जब इस बारे में बात की तो उसने बताया कि फुटपाथ पर रेहड़ी लगाने वाले उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं। यह एमसीडी के अधिकार में आते हैं। जवान ने बताया कि एमसीडी के लोग दो-तीन में यहां आते हैं और दौरा करके चले जाते हैं। मगर, इनको हटाने की कार्रवाई नहीं करते हैं।
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हाई कोर्ट और पुलिस पर जिम्मेदारी डाली
जब हमने उत्तरी दिल्ली नगर निगम के सामने जाम की समस्या और रेहड़ी वालों के अवैध कब्जे के बारे में पूछा तो प्रशासनिक अधिकारी (AO) अविनाश कुमार चौधरी ने कानून का हवाला देते हुए कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार अवैध रेहड़ी वालों को दिल्ली पुलिस हटवाती है। एमसीडी ऐसे मामलों में संबंधित पुलिस थाने को पत्र के जरिए फोर्स की मांग करती है। इसके बाद फोर्स मिलने के बाद एमसीडी एक्शन लेती है।

ऐसी कार्रवाई से मुक्ति कैसे?
रेलवे स्टेशन के पास अवैध कब्जे को लेकर जब सवाल किया गया तो अविनाश कुमार ने कहा कि हम कार्रवाई करते हैं लेकिन बाद में रेहड़ी वाले फिर से आ जाते हैं। एमसीडी उनका सामान उठा लाती है, जो बाद में दंड देने के बाद छोड़ दिया जाता है। उन्होंने बताया कि 1-2 जून को एमसीडी ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर इस अवैध कब्जे को हटवाने की कार्रवाई की थी। यह कैसी कार्रवाई होती है, जिसके बाद फिर से फुटपाथ पर अवैध कब्जा हो जाता है? मगर, 6 जून को यहां आने के बाद स्थिति जस की तस जामयुक्त मिली।












