पाकिस्तान भीषण ईंधन संकट में फंस चुका है। उसके पास कुछ दिनों का तेल बचा है। यही कारण है कि अब उसे पावर ग्रिड और एयरपोर्ट तक को तेल आपूर्ति ठप होने का अलर्ट देने पड़ रहा है। पाकिस्तान का अधिकांश तेल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब से आता है। इसकी आपर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती है। होर्मुज के बंद होने से पाकिस्तान में ईंधन संकट खड़ा हो गया है।
इस बीच पाकिस्तान की अटक रिफाइनरी ने तेल और गैस नियामक प्राधिकरण व पाकिस्तान सरकार को पत्र लिखकर तेल आपूर्ति ठप होने के बारे में आगाह किया है। अटक रिफाइनरी पाकिस्तान की सबसे पुरानी रिफाइनरी है। यहां रोजाना 53,400 बैरल कच्चा तेल प्रसंस्करण करने की क्षमता है। पिछले दो महीने में पाकिस्तान ने करीब 2 अरब डॉलर का तेल खरीदा है। सऊदी अरब यानबू बंदरगाह से पाकिस्तान को कच्चे तेल की आपूर्ति कर रहा है।
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ईवी की तरफ भाग रही पाकिस्तानी जनता
तेल आपूर्ति बाधित होने और बढ़ती कीमतों से परेशान पाकिस्तान की जनता तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तरफ रुख कर रही है। इसके अलावा हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ रही है। मौजूदा समय में पाकिस्तान में 30 से अधिक कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण और असेंबलिंग में लगी हैं। सिर्फ अप्रैल महीने में ही 40,000 इलेक्ट्रिक बाइक बिकी हैं। हालांकि पाकिस्तान में इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहनों की मांग कुछ खास नहीं है। अभी यहां इसका शुरुआती चरण है।
रूसी तेल खरीदने पर विचार, लेकिन कैसे करेगा साफ?
पाकिस्तान तेल संकट से निपटने की खातिर हाथ पैर मारने में जुटा है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक इस्लामाबाद रूस से तेल खरीदने पर विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान समेत कुछ देशों को अमेरिका रूस से तेल खरीदने की अनुमति दे सकता है। अमेरिका यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति में आई बाधा से निपटने के उद्देश्य से उठा सकता है।
मगर पाकिस्तान की दिक्कत यही खत्म नहीं होती है। दरअसल, पाकिस्तानी रिफाइनरियों के पास इतनी उन्नत तकनीक नहीं है कि वह रूसी तेल को साफ कर पाएं। मतलब अमेरिका से छूट मिलने के बावजूद पाकिस्तान सीधे तौर पर इसका कोई लाभ नहीं उठा पाएगा।
रणनीतिक तेल भंडार बनाना चाहता है पाकिस्तान, दिक्कत क्या है?
पाकिस्तान के पास कोई रणनीतिक तेल भंडार नहीं है। जबकि भारत के पास 60 दिनों से अधिक के रणनीतिक तेल भंडार हैं। अब पाकिस्तान की सरकार रणनीतिक तेल भंडार बनाने पर विचार कर रही है। बुधवार को पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने यह जानकारी दी। दुनियाभर के देश रणनीतिक तेल भंडार इस वजह से बनाते हैं ताकि युद्ध, आपदा और आपूर्ति में बाधा आने पर अर्थव्यवस्था को चलाया जा सके। मगर पाकिस्तान के पास सिर्फ पांच छह दिन का भंडार प्राइवेट कंपनियों के पास है।
कहां से रकम लाएगा पाकिस्तान?
पाकिस्तान में हर महीने करीब 550 मिलियन डॉलर का कच्चा तेल खपता है। अगर रणनीतिक भंडार बनाता है तो उसे करीब 300 मिलियन डॉलर की रकम खर्च करनी होगी। मौजूदा समय में पाकिस्तान 7 अरब डॉलर के आईएमएफ कार्यक्रम के तहत अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने में जुटा है। ऐसी स्थिति में रणनीतिक तेल भंडार की स्थापना करना, उसका रख-रखाव करना आसान नहीं होगा।
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खाड़ी देशों से क्या चाहता है पाकिस्तान?
पाकिस्तान चाहता है कि खाड़ी देश उसके यहां रणनीतिक तेल भंडार स्थापित करें, ठीक वैसे ही जैसे संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में कर रखा है। अटक रिफाइनरी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदिल खट्टक का कहना है कि सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देश पाकिस्तान में रणनीतिक तेल भंडार की स्थापना करें। संकट में पाकिस्तान जहां इसका इस्तेमाल करेगा, वहीं खाड़ी देश भी निर्यात केंद्र के तौर पर इस भंडार का उपयोग कर सकेंगे।
पाकिस्तान तक तेल की तस्करी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के बाद से ईरान से पाकिस्तान में तेल की तस्करी बढ़ी है। अनुमान के मुताबिक रोजाना 60 लाख लीटर तेल की तस्करी हो रही है। बाइक समेत अन्य वाहनों से लोग ईरान से पाकिस्तान तक तेल लेकर आते हैं। हाल ही में पाकिस्तान ने इराक के साथ मिलकर ईरान से एक डील की है। इसके तहत ईरान अब पाकिस्तान और इराकी तेल व एलएनजी जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा।











