जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने रिटायर प्रिंसिपल की आजीवन 25 फीसदी पेंशन रोकने के संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 24 अक्टूबर, 2024 को जारी आदेश पर रोक लगा दी है।
इसके साथ ही अदालत ने मामले में प्रमुख शिक्षा सचिव, माध्यमिक शिक्षा निदेशक और पेंशन निदेशक सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने यह आदेश शिवचरण की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के मार्च, 2014 में सवाई माधोपुर में तैनात रहने के दौरान पोषाहार राशि को लेकर आरोप लगाए गए थे। ऐसे में उसके खिलाफ विभागीय जांच आरंभ की गई।
इस दौरान 31 अगस्त, 2022 को वह रिटायर हो गया, लेकिन राजस्थान पेंशन नियम के अनुसार आगे की जांच की गई। याचिका में कहा गया कि 24 अक्टूबर, 2024 को माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने आदेश जारी कर आजीवन 25 फीसदी रोकने का दंड दे दिया।
इसके चुनौती देते हुए कहा गया कि रिटायर कर्मचारी को दंडित करने या पेंशन रोकने का अधिकार पेंशन नियमों के तहत निदेशक को नहीं है और वे इसके लिए सक्षम अधिकारी नहीं है।
ऐसे मामले में उपसचिव स्तर के अधिकारी गर्वनर के आदेश से पेंशन रोक सकते हैं। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने पेंशन रोकने के आदेश पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।











