लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कैंसर विशेषज्ञ एवं साहित्यकार प्रो.राजीव रंजन उपाध्याय का गुरुवार को 86 वर्ष की आयु में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनके निधन से चिकित्सा, साहित्य और बौद्धिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को जमथरा घाट पर किया गया, जहां बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिकों,अधिवक्ताओं, साहित्यकारों तथा शुभचिंतकों ने पहुंचकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
4 मार्च 1942 को जन्मे प्रो. राजीव रंजन उपाध्याय ने कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई थी। वे ईरान, नॉर्वे और नीदरलैंड जैसे देशों में कैंसर विज्ञान कथा लेखन के प्रोफेसर रहे तथा चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कैंसर विज्ञान पर उन्होंने विभिन्न भाषाओं में अनेक पुस्तकों का लेखन किया, जिन्हें चिकित्सा जगत में व्यापक सराहना मिली। भाजपा महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव ने बताया कि प्रो. उपाध्याय अखिल भारतीय विज्ञान कथा लेखन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी गहरी रुचि थी। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध साहित्यकार बद्री नारायण उपाध्याय ‘प्रेमधन’ के पौत्र थे। उनके निधन को चिकित्सा और साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। श्रद्धांजलि देने वालों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ प्रो.राजीव रंजन उपाध्याय का निधन, शोक की लहर
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