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चीन के साथ तीस्ता नदी पर ‘खेल’ कर रहा बांग्लादेश, भारत के लिए चिंता क्यों?

भारत बांग्लादेश की तीस्ता नदी विकास परियोजना पर नजर रख रहा है। बांग्लादेश के इस प्रोजेक्ट में चीन मदद कर रहा है। भारत ने कहा है कि वह पड़ोसी देशों में हो रही ऐसी हर गतिविधि पर नजर रखता है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत तीस्ता नदी से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर पहले से बांग्लादेश को अपनी बात बता चुका है।

पिछले महीने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान चीन दौरे पर थे। अब चीन और बांग्लादेश मिलकर तीस्ता नदी के व्यापक प्रबधन पर जोर दे रहे हैं चीन ने ‘चाइना-बांग्लादेश-म्यांमार इकोनॉमिक कॉरिडोर (CBMEC) बनाने की योजना तैयार की है। बांग्लादेश इस योजना के लिए फिलहाल तैयार नजर आ रहा है।

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रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय:-
‘हम अपने पड़ोस में होने वाले हर विकास पर नजर रखते हैं और जरूरत अनुसार उपयुक्त कदम उठाते हैं।’

तीस्ता पर भारत की चिंता क्या है?

तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच 54 साझा नदियों बहती हैं। सिर्फ तीस्ता पर अभी तक पानी के बंटवारे का कोई समझौता नहीं हुआ है। भारत को चिंता है कि अगर चीन इस परियोजना में शामिल होता है तो चीन की पहुंच ‘चिकन नेक’ के जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास वाले इलाकों तक हो सकती है। भारत यह किसी भी हाल में नहीं चाहता है।

शेख हसीना ने राहत दी, तारिक रहमान मुश्किलें बढ़ाएंगे?

शेख हसीना, भारत के साथ बेहतर रिश्तों के पक्षतर थे। तारिक रहमान का रुख, अपनी मां खालिदा जिया की तरह भारत से प्रतिद्वंद्विता की तरह ही है। वह अपने फायदा के लिए चीन के पक्ष में झुक सकते हैं। उनसे पहले बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के संरक्षक मोहम्मद यूनुस ने चीन परस्ती वाले तेवर भी दिखाए थे।

भारत ने बांग्लादेश पर क्या रुख अपनाया है?

शेख हसीना की सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीस्ता नदी के संरक्षण के लिए भारतीय टीम भेजने की बात कही थी। भारत बांग्लादेश में तीस्ता परियोजना में मदद करना चाहता है। तारिक रहमान, यह मदद चीन से लेना चाहते हैं।

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चीन के मंसूबे क्या हैं?

चीन बांग्लादेश और म्यांमार के साथ आर्थिक गलियारा बनाने और तीस्ता परियोजना पर आगे बढ़ रहा है। बांग्लादेश की नई बांग्लादेश नेशनिल्ट पार्टी (BNP) के नेतृत्व वाली तारिक रहमान सरकार का झुकाव चीन की ओर है। भारत का साफ कहना है कि तीस्ता प्रोजेक्ट पर नजर रहेगी, उसी आधार पर फैसले लिए जाएंगे।

क्या है बांग्लादेश-चीन तीस्ता प्रोजेक्ट?

बांग्लादेश चीन की मदद से तीस्ता नदी पर ‘तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना’ नाम से एक महत्वाकांक्षी परियोजना चला रहा है, जिस पर चीन लाखों खर्च करेगा। इसका मकसद वार्षिक बाढ़ और सूखे की समस्या का स्थाई समाधान निकालना है। इसके तहत नदी की ड्रेजिंग, 100 किलोमीटर से ज्यादा लंबे नए तटबंधों का निर्माण, ड्रेजिंग और आधुनिक सिंचाई नेटवर्क बनाने की योजना है।

भारत के साथ तीस्ता जल बंटवारे पर 2011 का समझौता असफल होने और खेती पर पड़ रहे असर की वजह से बांग्लादेश ने यह फैसला किया है। यह प्रोजेक्ट, बिना भारत की मदद से पूरा नही हो सकता है। भारत अगर पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में तीस्ता नदी पर स्थित गजलडोबा तीस्ता बैराज को खोलेगा नहीं तो बांग्लादेश को पानी नहीं मिलेगा। बांग्लादेश भले ही इस प्रोजेक्ट को अपना फैसला बता रहा हो लेकिन अब चीन, बांग्लादेश के साथ मिलकर भारत के लिए नई चुनौती पेश कर रहा है।


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