सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने अपने वाराणसी दौरे के दूसरे दिन ‘स्कूल चलो अभियान’ की शुरुआत करते हुए शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों के महत्व पर विशेष बल दिया। शिवपुर स्थित एक परिषदीय विद्यालय में उन्होंने बच्चों को खुद अपने हाथों से स्कूल बैग पहनाए, किताबें वितरित कीं और उनसे संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने बच्चों द्वारा तैयार की गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया और उनके प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी हासिल की।
धार्मिक स्थलों पर पूजन-अर्चना से हुई शुरुआत
दौरे की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने Kal Bhairav Temple में दर्शन-पूजन किया, जहां उन्होंने मंदिर की चौखट स्पर्श कर श्रद्धा व्यक्त की और गर्भगृह में आरती की। इसके बाद वे Kashi Vishwanath Temple पहुंचे और विधिवत षोडशोपचार पूजन कर बाबा विश्वनाथ की आरती उतारी। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना भी की।
शिक्षा व्यवस्था के पुराने हालात का किया उल्लेख
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 के शुरुआती समय को याद किया, जब प्रदेश के कई सरकारी विद्यालयों की स्थिति काफी खराब थी और छात्र संख्या लगातार गिर रही थी। उन्होंने एक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि एक स्कूल में छात्रों की संख्या 10 से भी कम रह गई थी। इस पर उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य से सवाल किया था कि समस्या छात्रों की रुचि में है या शिक्षकों के प्रयास में।
शिक्षकों को जिम्मेदारी निभाने का संदेश
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर संस्कार और जिज्ञासा विकसित करना है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएं, ताकि शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन आए। साथ ही उन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए।
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