बस्ती/हरैया: हरैया तहसील क्षेत्र में 4 अप्रैल को स्कूल बस से नाबालिग छात्रों को बीच रास्ते उतारने का मामला अब तूल पकड़ गया है। बाल कल्याण समिति (CWC) बस्ती ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। समिति के चेयरपर्सन प्रेरक मिश्रा ने एआरटीओ प्रवर्तन को 10 अप्रैल तक जवाब देने का निर्देश दिया है और इसे बच्चों के साथ ‘अमानवीय कृत्य’ बताया है। यह घटना 4 अप्रैल की सुबह की है, जब ग्राम डुहवा मिश्र स्थित एसएनएसबी इंटर कॉलेज के छात्र स्कूल बस से पढ़ने जा रहे थे। हर्रैया थाना क्षेत्र के बढ़हर पेट्रोल पंप के पास आरटीओ टीम ने बस को रोका। आरोप है कि इस दौरान बस चालक का मोबाइल छीन लिया गया और जांच के नाम पर बस को थाने ले जाने की बात कही गई। इसके बाद बस में सवार करीब 22 बच्चों को बीच सड़क पर उतार दिया गया। छात्रों ने अधिकारियों से पहले स्कूल पहुंचाने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें बताया गया कि बच्चों को स्कूल पहुंचाना विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके बाद बच्चों को सुनसान नहर किनारे के रास्ते से पैदल स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ा, जहां जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है। इस मामले में आरटीओ अधिकारी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की टीम पर गंभीर आरोप लगे हैं। घटना के विरोध में 6 अप्रैल को सुनवाई न होने पर विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों ने उपजिलाधिकारी हरैया को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। सीडब्ल्यूसी के सदस्य अजय श्रीवास्तव, डॉ. संतोष श्रीवास्तव और मंजू त्रिपाठी ने भी इस मामले को बाल अधिकारों का उल्लंघन और बाल अधिनियम 2015 की मंशा के विपरीत माना है। चेयरपर्सन प्रेरक मिश्रा ने कहा कि वाहन की जांच करना उचित है, लेकिन बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद ही ऐसी कार्रवाई की जानी चाहिए थी। समिति ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। मामले में आरटीओ अधिकारी प्रदीप श्रीवास्तव से बात करने पर उन्होंने बताया कि उन्होंने संबंधित जानकारी और वीडियो एआरटीओ मैडम को भेज दिया है।
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