लखनऊ। लोक संस्कृति शोध संस्थान की 88वीं लोक चौपाल रविवार को लल्लूमल धर्मशाला परिसर, डालीगंज, गोमती तट पर आयोजित हुई। सावन, बारहमासा और लोक संस्कृति पर केंद्रित इस आयोजन में लोकगीतों के साथ चौसा, दशहरी और सफेदा आमों की सुस्वादु मिठास ने आत्मीय वातावरण का सृजन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अर्चना गुप्ता ने श्रीराम स्तुति एवं सावन गीत जमुना किनारे पड़ा हिंडोला से किया। इसके बाद चौपाल चौधरी विमल पन्त ने सखि री श्याम नहीं घर आये, घेर आई काली रे बदरी, वरिष्ठ लोक गायिका नीरा मिश्रा ने रिमझिम बरसे कारी बदरिया, शकुन्तला श्रीवास्तव ने घिरि आई काली घटा, अरुणा उपाध्याय ने सैंया बसे विदेसवा में, राशि श्रीवास्तव ने अरे रामा बदरा में चमके बिजुरिया, प्रो. उषा बाजपेयी ने कारगिल के शहीदों को समर्पित रचना जहां…, शिखा श्रीवास्तव ने पिया मेंहदी सुहाए जयपुर की तथा डा. रश्मि उपाध्याय ने घेरि घेरि आई सावन की बदरिया प्रस्तुत कर सराहना प्राप्त की। सरिता अग्रवाल, ज्योति किरण रतन, अलका चतुर्वेदी, सौरभ कमल एवं अर्चित श्रीवास्तव ने भी अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा।
इस अवसर पर अवध लेडीज क्लब की सचिव मनोरमा मिश्रा, डा. रामकुमार शुक्ला, भूषण अग्रवाल, अल्पना मेहरोत्रा, विवेक श्रीवास्तव, गौरव गुप्ता, सोनल ठाकुर, डा. एस.के. गोपाल, आफताब सहित अनेक साहित्यकार, लोक कलाकार एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।
सावन के गीतों संग महकी चौसा और सफेदा आमों की मिठास
RELATED ARTICLES
Recent Comments
on Hello world!












