HomeHealth & Fitnessएकजुटता और विज्ञान के साथ दें टीबी को मात:डॉ सूर्य कान्त

एकजुटता और विज्ञान के साथ दें टीबी को मात:डॉ सूर्य कान्त

लखनऊ। केजीएमयू में विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस साल विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम है – “ टुगेदर फॉर हेल्थ,स्टैंड विद साइंस जो यह संदेश देती है कि टीबी जैसी प्रमुख स्वास्थ्य समस्या को विज्ञान और सभी के सहयोग से ही समाप्त किया जा सकता है। परिवार के सदस्यों,दोस्तों,सहकर्मियों का दायित्व है कि अगर किसी को टीबी के लक्षण जैसे दो हफ्तों से ज्यादा खांसी,खांसी में खून,बुखार,भूख कम लगना,वजन कम होना आदि हैं,तो पास के सरकारी अस्पताल में बलगम और एक्स-रे की जांच कराए। टीबी की ये जांचें और इलाज सभी सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत निशुल्क होता हैं। इसलिए सभी से यह अपेक्षा है कि ऐसे लक्षणों को अनदेखा करने के बजाय समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी होता है। जनपद के दो मामलों में यह बात सामने आयी है।
केस 1 -ऐशबाग निवासी 28 वर्षीय रेनू को लगभग एक माह से खांसी आ रही थी और बुखार था। वह अपने आप से ही दवा ले रही थी लेकिन जब  लगभग एक माह के बाद भी आराम नहीं मिला तो  चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने टीबी की आशंका जताई। उसके बाद उन्होंने  जिला टीबी अस्पताल में स्पुटम की जांच और एक्स रे कराया तो फेफड़ों की टीबी की पुष्टि हुई।
केस 2 –  52 वर्षीय शालिनी बताती हैं कि वह जब 15 साल की थीं तो उन्हें टीबी हुआ था जिसके लिए उन्हें लगभग डेढ़ साल दवा खानी पड़ी थी। वह इतना परेशान हो गई थीं कि दवा छोड़ने का मन करता था लेकिन परिवार के सदस्यों के सहयोग से इलाज जारी रखा और स्वस्थ हुईं।
केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ.सूर्य कांत बताते हैं कि टीबी पूरी तरह से ठीक हो जाती है लेकिन इसके लिए समय पर जांच और नियमित इलाज बेहद जरूरी होता है। टीबी की समय से पहचान में परिवार के सदस्यों, दोस्तों,सहकर्मियों और समाज की भूमिका अहम है।अक्सर मरीज टीबी के शुरुआती लक्षणों जैसे खांसी,बुखार,वजन में कमी आदि को अनदेखा करते हैं जो कि रेनू के केस में दिखाई दे रहा है। ऐसे में आसपास के लोगों में जागरूकता मरीज को जांच के लिए प्रेरित कर सकती है। परिवार का सहयोग नियमित इलाज में मदद कर सकता है और दोस्तों, समाज व सहकर्मी भेदभाव के बजाए समर्थन और सहानुभूति देकर सहयोग कर सकते है। डॉ.सूर्यकांत के अनुसार पहले टीबी का इलाज लंबा चलता था जैसा कि शालिनी का केस दिखता है। अब एडवांस दवाओं के कारण छह माह चलता है। एमडीआर के केस में नौ माह चलता है। जांच के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई हैं पहले जहां माइक्रोस्कोपी जांच और एक्स रे  होता था अब इसके साथ आधुनिक तकनीकी जैसे-ट्रूनॉट, सीबीनाट, एआई बेस्ड हैंड होल्डिंग एक्सरे मशीन आ गई हैं।

 
 
 
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