कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध के पीछे छिपा एक ऐसा काला सच सामने आया है जिसने जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दाखिल हालिया चार्जशीट में अभिनेत्री रान्या राव (Ranya Rao) और उनके साथी तरुण राजू के अंतरराष्ट्रीय गोल्ड स्मगलिंग सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा खोला गया है। यह कहानी सिर्फ तस्करी की नहीं है, बल्कि इसमें अफ्रीका की खदानों से लेकर दुबई के स्वर्ण बाजारों और भारत के वीआईपी प्रोटोकॉल का एक ऐसा कॉकटेल है, जिसे सुनकर फिल्म की स्क्रिप्ट भी फीकी लगने लगे। रान्या राव ने महज एक साल के भीतर 127 किलो से ज्यादा सोना भारत में खपा दिया, जिसकी कीमत लगभग 102 करोड़ रुपये आंकी गई है।
दुबई से शुरू हुआ ‘खूनी’ खेल
जांच में खुलासा हुआ है कि Ranya Rao और तरुण की महत्वाकांक्षा बहुत बड़ी थी। उन्होंने सीधे अफ्रीका की खदानों से सोना मंगाकर मोटा मुनाफा कमाने का प्लान बनाया था। इसके लिए दुबई में ‘वीरा डायमंड्स ट्रेडिंग LLC’ नाम की एक फर्जी कंपनी खड़ी की गई। उन्होंने युगांडा, केन्या और तंजानिया के एजेंटों से संपर्क साधा। युगांडा के एक एजेंट के साथ 50 किलो सोने की बड़ी डील के चक्कर में रान्या और उनके पार्टनर ने 2 करोड़ रुपये से ज्यादा गंवा दिए। अफ्रीका में ठगी का शिकार होने के बाद उन्होंने अपना पैंतरा बदला। अब उन्होंने दुबई के ‘देइरा गोल्ड सूक’ के स्थानीय डीलरों से कैश में सोना खरीदना शुरू किया। मकसद साफ था—कोई डिजिटल निशान न छोड़ना और सीधे कैश के जरिए सोने की ईंटों को ठिकाने लगाना।
फर्जी डेस्टिनेशन का शातिर जाल
तस्करी का जो तरीका Ranya Rao ने अपनाया, वह बेहद जोखिम भरा और चौंकाने वाला था। तरुण राजू कागजों पर यह दिखाता था कि सोना दुबई से स्विट्जरलैंड या थाईलैंड जैसे देशों में भेजा जा रहा है। इसके लिए बाकायदा फर्जी टिकटें बुक की जाती थीं ताकि कस्टम अधिकारियों को लगे कि सोना केवल ट्रांजिट में है। लेकिन असलियत में वह सोना दुबई एयरपोर्ट पर ही रान्या राव को सौंप दिया जाता था। रान्या उस सोने को बेहद शातिर तरीके से अपने शरीर (Body Cavity) में छिपाकर फ्लाइट में बैठती थीं। मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच रान्या ने 15 बार ऐसी यात्राएं कीं। हर बार वह भारी मात्रा में सोना लेकर आतीं और भारत के अलग-अलग ज्वेलर्स को सप्लाई कर देती थीं।
VIP प्रोटोकॉल बना सुरक्षा कवच
इस पूरे स्कैंडल का सबसे हैरान करने वाला पहलू Ranya Rao का पारिवारिक बैकग्राउंड है। रान्या एक बेहद प्रभावशाली सीनियर पुलिस अधिकारी (IPS) की सौतेली बेटी हैं। इसी रसूख का फायदा उठाकर वह एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच और कड़ी पूछताछ से बचती रहीं। उन्हें अक्सर एयरपोर्ट पर वीआईपी प्रोटोकॉल मिलता था, जिससे सुरक्षाकर्मियों को उन पर कभी शक ही नहीं हुआ। रान्या ने अपने इसी ‘प्रोटोकॉल कवच’ का इस्तेमाल कर देश की अर्थव्यवस्था को करोड़ों की चपत लगाई। उन्हें लगा था कि वर्दी का साया उन्हें हमेशा बचा लेगा, लेकिन 3 मार्च 2025 को DRI (राजस्व खुफिया निदेशालय) ने बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उनके इस खेल का अंत कर दिया, जब वह 14 किलो से ज्यादा सोना शरीर में छिपाकर उतरी थीं।
ED की बड़ी कार्रवाई: 34 करोड़ की संपत्ति कुर्क
DRI की गिरफ्तारी के बाद जब मामला CBI और फिर ED के पास पहुंचा, तो मनी लॉन्ड्रिंग की परतें खुलती चली गईं। ED ने अब तक Ranya Rao की 34 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियां अटैच कर दी हैं। चार्जशीट के अनुसार, यह सिर्फ एक अभिनेत्री का शौक नहीं बल्कि एक सुसंगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह था जो हवाला और तस्करी के जरिए भारत में ‘ब्लैक मनी’ को सोने में बदल रहा था। फिलहाल रान्या और उनके सहयोगी सलाखों के पीछे हैं और जांच एजेंसी अब उन ज्वेलर्स पर शिकंजा कस रही है जिन्होंने इस तस्करी के सोने को बाजार में खपाने में रान्या की मदद की थी। यह केस ग्लैमर जगत के उस अंधेरे पक्ष को उजागर करता है जहाँ रातों-रात अमीर बनने की चाहत सीधे सलाखों तक ले जाती है।
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