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फोटोशूट के लिए गुलाबी रंगा गया हाथी बना मौत का शिकार, रूसी इन्फ्लुएंसर पर गिरेगी गाज

जयपुर में एक विदेशी सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर के फोटोशूट के लिए गुलाबी रंग में रंगे गए हाथी की मौत के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। दरअसल करीब डेढ़ महीने पहले हाथी की मौत हुई थी, जिसके बाद अब वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि वन्यजीव प्रेमियों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे सीधे तौर पर पशु क्रूरता का मामला बताया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

दरअसल यह मामला तब सामने आया जब रूस की इनफ्लुएंसर जूलिया बुरुलेवा द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। जूलिया पिछले साल जयपुर घूमने आई थीं और यहां की “पिंक सिटी” पहचान से काफी प्रभावित हुईं। इसी वजह से उन्होंने आमेर किले के पास स्थित हाथी गांव में एक थीम बेस्ड फोटोशूट कराने का फैसला किया। इस फोटोशूट में 65 साल के एक बुजुर्ग हाथी और एक महिला मॉडल यशस्वी को गुलाबी रंग में रंगा गया था। जूलिया ने करीब तीन महीने पहले इन तस्वीरों और वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया था, जो अब फिर से चर्चा में आ गए हैं।

नैतिकता पर सवाल
शुरुआत में इन तस्वीरों और वीडियो ने लोगों का ध्यान खींचा, लेकिन जल्द ही पशु प्रेमियों ने जानवरों को इस तरह रंगने की सुरक्षा और नैतिकता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। विवाद तब और बढ़ गया जब यह जानकारी सामने आई कि जिस हाथी को गुलाबी रंग में रंगा गया था, उसकी करीब डेढ़ महीने पहले मौत हो चुकी है। इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने घटना को जानवरों के प्रति क्रूरता बताया
वन्यजीव प्रेमियों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस पूरी घटना को जानवरों के प्रति क्रूरता का उदाहरण बताया है। उनका कहना है कि हाथी की संवेदनशील त्वचा पर रासायनिक रंगों का इस्तेमाल उसकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। केमिकल वाले रंगों से त्वचा में जलन, एलर्जी और कई तरह के संक्रमण हो सकते हैं, जो शरीर के अंदरूनी अंगों को भी प्रभावित कर सकते हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि हाथी पहले से ही बुजुर्ग था और ऐसे रासायनिक प्रभाव को झेलना उसके लिए मुश्किल रहा होगा। उनका कहना है कि यही उसकी मौत की वजह भी बन सकती है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच करने की मांग की है, ताकि यह साफ हो सके कि हाथी की मौत का असली कारण क्या था। साथ ही उन्होंने इनफ्लुएंसर, फोटोशूट के आयोजकों और हाथी गांव के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।

हालांकि हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बबलू खान ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि हाथी को बहुत थोड़े समय के लिए ही रंगा गया था और इसमें किसी भी तरह के हानिकारक रासायनिक रंगों का इस्तेमाल नहीं किया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस्तेमाल किए गए रंग प्राकृतिक और त्वचा के लिए सुरक्षित थे। बबलू खान के अनुसार जिस हाथी की मौत हुई है वह 65 साल का बुजुर्ग था और उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग हाथियों की उम्र के साथ प्राकृतिक रूप से मौत होना कोई असामान्य बात नहीं है और इस घटना को फोटोशूट से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हाथी गांव में जानवरों की देखभाल से जुड़े सभी नियमों का पालन किया जाता है।

मामले के तूल पकड़ने और सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव के बाद वन विभाग भी हरकत में आ गया है। वन विभाग के अधिकारियों ने अब इस घटना की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यह देखा जाएगा कि फोटोशूट के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं और क्या जानवर के साथ किसी तरह की क्रूरता की गई है। यदि जांच में बिना अनुमति गतिविधि या जानवर के साथ क्रूरता की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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