जीविका दीदियों को बड़ी राहत: अब आसान होगा स्वरोजगार के लिए ऋण प्राप्त करना
माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर निर्भरता होगी कम
Bihar में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं, जिन्हें आमतौर पर जीविका दीदी कहा जाता है, के लिए एक राहत भरी पहल शुरू की जा रही है। अब उन्हें स्वरोजगार या छोटे व्यवसाय के लिए माइक्रो फाइनेंस या नॉन बैंकिंग कंपनियों से कर्ज लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। नई व्यवस्था के तहत महिलाओं को Bihar Rural Livelihoods Promotion Society यानी जीविका के माध्यम से ही एक सप्ताह के भीतर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। जिला स्तर पर इस योजना को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है, ताकि महिलाओं को समय पर और आसान तरीके से वित्तीय सहायता मिल सके।
तीन लाख से अधिक महिलाओं को मिलेगा लाभ
इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ का गठन किया गया है। इसके माध्यम से जिले की तीन लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिलने की संभावना है। जिले में लगभग 26 हजार से अधिक जीविका समूह सक्रिय हैं, जिनसे जुड़कर लाखों महिलाएं छोटे-छोटे कारोबार और स्वरोजगार के कार्य कर रही हैं। नई व्यवस्था से इन महिलाओं को अपनी आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पूंजी आसानी से मिल सकेगी।
ऑनलाइन आवेदन से लेकर भुगतान तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल
जिला परियोजना प्रबंधक राकेश कुमार के अनुसार ऋण लेने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है। महिलाएं मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकेंगी। आवेदन से लेकर ऋण स्वीकृति और उसकी वापसी तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और महिलाओं को अनावश्यक कागजी प्रक्रिया या लंबी प्रतीक्षा से राहत मिलेगी। इस व्यवस्था की निगरानी प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
ऋण की विभिन्न श्रेणियां निर्धारित
नई व्यवस्था में महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग प्रकार के ऋण की सुविधा दी जाएगी। अल्पकालीन ऋण के रूप में 15 हजार रुपये तक की राशि मिल सकेगी, जिसकी अधिकतम अवधि 12 महीने होगी। इसके अलावा सूक्ष्म ऋण 15 हजार से 75 हजार रुपये तक दिया जाएगा, जिसकी अवधि 24 महीने निर्धारित की गई है। वहीं लघु ऋण के तहत 75 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक की राशि उपलब्ध होगी, जिसे 36 महीनों के भीतर चुकाना होगा। इस व्यवस्था से महिलाओं को अपने कारोबार के अनुसार वित्तीय सहायता लेने की सुविधा मिलेगी।
महिलाओं को कर्ज के दबाव से मिलेगी राहत
पिछले कुछ समय में माइक्रो फाइनेंस और अन्य निजी कंपनियों की ओर से कर्ज वसूली के लिए किए जाने वाले दबाव की कई शिकायतें सामने आई थीं। कई मामलों में यह दबाव महिलाओं और उनके परिवारों के लिए गंभीर समस्या बन गया था। नई व्यवस्था से उम्मीद की जा रही है कि महिलाएं ऐसे निजी कर्जदाताओं के जाल में फंसने से बच सकेंगी। साथ ही उन्हें सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से ऋण मिल सकेगा, जिससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
डिस्क्लेमर:
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। योजना से संबंधित अंतिम और आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित सरकारी विभाग या आधिकारिक घोषणा को ही मान्य माना जाना चाहिए।

































