Harbhajan Singh: आम आदमी पार्टी के सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने गुरुवार को राज्यसभा में एक गंभीर सामाजिक मुद्दा उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री को लेकर चिंता जताई और कहा कि इसका सबसे ज्यादा नकारात्मक असर बच्चों और किशोरों पर पड़ रहा है। हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने कहा कि यह केवल तकनीक या इंटरनेट से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि समाज की नैतिकता, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल है।
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया ज्ञान, संवाद और नए विचारों को साझा करने का एक मजबूत माध्यम बन चुका है। इसके जरिए लोग नई-नई चीजें सीख रहे हैं और दुनिया के साथ जुड़ रहे हैं। लेकिन इसी प्लेटफॉर्म पर अश्लील और अशोभनीय सामग्री भी तेजी से फैल रही है, जो समाज के लिए चिंता का विषय बन गई है। हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने कहा कि अगर इस समस्या पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।
किशोरों के मानसिक विकास पर पड़ सकता है असर
हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने कहा कि कई शोध और रिपोर्ट यह संकेत देती हैं कि कम उम्र के बच्चे बड़ी संख्या में सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री तक पहुंच रहे हैं जो उनके लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि जब बच्चे कम उम्र में ही ऐसी चीजें देखने लगते हैं तो इसका उनके मानसिक विकास और सोच पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि अगर 13 या 14 साल का कोई किशोर, जो अभी सही और गलत का अंतर समझने की प्रक्रिया में है, लगातार सोशल मीडिया पर अश्लील तस्वीरें और वीडियो देखता है, तो उसके मन में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना कैसे विकसित होगी।
हरभजन सिंह ने कहा कि ऐसी सामग्री के कारण कई बार किशोर महिलाओं को एक इंसान के रूप में नहीं बल्कि एक वस्तु की तरह देखने लगते हैं। इससे समाज में अपराध, उत्पीड़न और गलत व्यवहार जैसी समस्याएं बढ़ने का खतरा रहता है। इसलिए इस विषय को केवल व्यक्तिगत नैतिकता का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा भी माना जाना चाहिए।
दुनिया के कई देशों ने बनाए सख्त कानून
राज्यसभा में बोलते हुए हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने यह भी बताया कि दुनिया के कई विकसित देशों ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि फ्रांस ने कई वेबसाइटों के लिए आयु सत्यापन यानी एज वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। अगर कोई वेबसाइट इन नियमों का पालन नहीं करती है तो उसे बंद भी किया जा सकता है। हरभजन सिंह (Harbhajan Singh)का कहना है कि इन उदाहरणों से साफ होता है कि दुनिया के कई देश इस समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं। क्योंकि यह केवल इंटरनेट का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और समाज के भविष्य से जुड़ा विषय है।
भारत में भी सख्त नीति बनाने की मांग
हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने कहा कि भारत जैसे देश में, जहां हमारी संस्कृति और परंपराएं नारी सम्मान और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित रही हैं, वहां इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा और ठोस नीति की जरूरत है। उन्होंने सरकार से अपील की कि सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नियम बनाए जाएं।
उन्होंने सुझाव दिया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सख्त निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए और जहां जरूरत हो वहां आयु सत्यापन प्रणाली लागू की जानी चाहिए। इसके अलावा जो लोग या प्लेटफॉर्म नियमों का उल्लंघन करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए।
हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण पहचान है, लेकिन अगर कोई गतिविधि बच्चों के हितों और समाज की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने लगे, तो उस पर संतुलित और जिम्मेदार नियंत्रण जरूरी हो जाता है। उनका मानना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल शिक्षा, ज्ञान और सकारात्मक गतिविधियों के लिए होना चाहिए, ताकि यह समाज को आगे बढ़ाने का माध्यम बने।
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