“कानून संभाल नहीं सकते तो इस्तीफा दे दीजिए!” संभल नमाज विवाद पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, डीएम-एसपी को लगाई फटकार

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Allahabad High Court में संभल जिले में रमजान के दौरान नमाज को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। High Court ने साफ कहा कि किसी भी मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले लोगों की संख्या को प्रशासन मनमाने तरीके से सीमित नहीं कर सकता। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि राज्य का सबसे बड़ा कर्तव्य यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक को अपने धार्मिक स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा या इबादत करने का अधिकार मिले। अदालत की इस टिप्पणी के बाद मामला काफी चर्चा में आ गया है। अदालत ने स्थानीय प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि धार्मिक गतिविधियों को रोकना।

डीएम और एसपी को लेकर कोर्ट की तीखी टिप्पणी

इस मामले की सुनवाई जस्टिस Atul Sreedharan और जस्टिस Siddharth Nandan की डिवीजन बेंच कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि स्थानीय अधिकारी यह महसूस करते हैं कि वे कानून-व्यवस्था की स्थिति संभाल नहीं सकते और इसी कारण से मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित कर रहे हैं, तो उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। High Court ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे अधिकारियों को या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर अपना तबादला करवा लेना चाहिए। High Court ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का काम लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उन्हें सीमित करना। इस टिप्पणी के बाद कोर्ट रूम में मौजूद लोगों के बीच भी काफी चर्चा हुई।

याचिका में क्या कहा गया, क्यों उठा विवाद

दरअसल यह मामला उस समय सामने आया जब संभल निवासी मुनाजिर खान ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में कहा गया कि रमजान के दौरान उन्हें गाटा संख्या 291 पर स्थित एक जगह पर नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। याचिकाकर्ता का दावा था कि वहां एक मस्जिद मौजूद है और वहां नमाज पढ़ने की परंपरा रही है। हालांकि सुनवाई के दौरान High Court में मस्जिद या नमाज के लिए उपयोग होने वाले स्थान की कोई तस्वीर या ठोस दस्तावेज पेश नहीं किए गए। इस पर अदालत ने कहा कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आना जरूरी है। अदालत ने राज्य सरकार से भी इस मामले में स्पष्ट जानकारी देने को कहा ताकि यह तय किया जा सके कि प्रशासन ने किन परिस्थितियों में नमाजियों की संख्या सीमित करने का फैसला लिया था।

अगली सुनवाई की तारीख तय, राज्य सरकार से जवाब तलब

सुनवाई के दौरान High Court ने यह भी कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा दिया गया मौलिक अधिकार है और इसे अनावश्यक रूप से सीमित नहीं किया जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करे और बताए कि स्थानीय प्रशासन ने किस आधार पर यह आदेश जारी किया था। इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की है। तब तक राज्य सरकार और प्रशासन को अपना जवाब दाखिल करना होगा। फिलहाल इस मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों में हलचल पैदा कर दी है। अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह साफ हो सकता है कि प्रशासनिक फैसले को अदालत किस तरह देखती है।

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