ईरान में आग और आक्रोश का विस्फोट, दो हफ्ते से जारी विरोध प्रदर्शनों में दो सौ से ज्यादा मौतें, अमेरिका इज़रायल पर सीधा आरोप

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ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने रविवार को दो सप्ताह पूरे कर लिए और इस दौरान हिंसा, दमन और टकराव की घटनाओं में मरने वालों की संख्या 200 के पार पहुंच गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी समूहों का दावा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई, झड़पों और गोलीबारी में बड़ी संख्या में नागरिकों की जान गई है, जबकि सरकार इन आंकड़ों को खारिज करती रही है। राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों में रविवार को भी प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की, अलाव जलाए और सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया, जबकि इंटरनेट और संचार सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध जारी रहे।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने रविवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़रायल ईरान में “अराजकता और अव्यवस्था फैलाने” के इरादे से दंगे भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाहरी शक्तियां देश की स्थिरता को कमजोर करने के लिए “दंगाइयों” और “आतंकवादियों” को उकसा रही हैं और आम नागरिकों से अपील की कि वे ऐसे तत्वों से दूरी बनाए रखें। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सरकार देश की सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगी और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

सरकारी बयान ऐसे समय आए हैं जब सड़कों पर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और तस्वीरों में प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर नाचते, नारे लगाते और अलाव के आसपास जुटते देखा गया है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल है क्योंकि सरकार ने विदेशी मीडिया की पहुंच सीमित कर दी है और इंटरनेट सेवाओं को कई इलाकों में बाधित कर दिया गया है। इसके बावजूद, देश के भीतर और बाहर से मिल रही सूचनाएं बताती हैं कि प्रदर्शन अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे कस्बों और प्रांतीय इलाकों में भी फैल चुके हैं।

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प्रदर्शनों के बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ ने भी तीखा बयान देते हुए कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमला किया तो अमेरिका की सैन्य ठिकाने और शिपिंग केंद्र “वैध लक्ष्य” होंगे। संसद में दिए गए उनके बयान का सरकारी टेलीविजन पर प्रसारण किया गया। उनके इस बयान को इज़रायल की ओर भी इशारा माना जा रहा है, जिसे ईरान मान्यता नहीं देता और जिसे वह “कब्जे वाला फिलिस्तीनी क्षेत्र” कहता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़े रुख और संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

ईरान के भीतर बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया को चिंता में डाल दिया है। सूत्रों के अनुसार इज़रायल ने संभावित अमेरिकी हस्तक्षेप की आशंका को देखते हुए अपनी सुरक्षा तैयारियां बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में पहले से ही कई मोर्चों पर अस्थिरता बनी हुई है और ईरान में जारी संकट ने हालात को और जटिल बना दिया है।

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मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सुरक्षा बलों ने कई जगहों पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, रबर बुलेट और कथित तौर पर असली गोलियों का इस्तेमाल किया है। दर्जनों लोगों की गिरफ्तारी की खबरें भी सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को अज्ञात स्थानों पर रखा गया है और उनके परिवारों को कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। सरकार इन आरोपों से इनकार करती है और कहती है कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

ईरान की सरकार का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं हैं और इनमें विदेशी ताकतों से प्रेरित हिंसक तत्व शामिल हैं। सरकारी मीडिया में बार-बार यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और इज़रायल सोशल मीडिया और गुप्त नेटवर्क के जरिए लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, प्रदर्शनकारियों और विपक्षी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बाहरी दुश्मनों का हवाला दे रही है।

आर्थिक दबाव, महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक स्वतंत्रता की कमी को लेकर जनता में लंबे समय से असंतोष पनपता रहा है। हालिया घटनाओं ने इस असंतोष को सड़कों पर ला दिया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा आंदोलन पिछले वर्षों के प्रदर्शनों की तुलना में अधिक व्यापक और गहराई वाला है, क्योंकि इसमें युवा, महिलाएं और कामकाजी वर्ग बड़ी संख्या में शामिल हैं।

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अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी ईरान पर टिकी हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर चिंता जताई है और ईरानी अधिकारियों से संयम बरतने की अपील की है। वहीं ईरान ने इन बयानों को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है। संयुक्त राष्ट्र में भी स्थिति पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है।

तेहरान की सड़कों पर रविवार रात तक तनाव बना रहा। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों के छोटे-छोटे समूह अचानक इकट्ठा होकर नारेबाजी करते और फिर तितर-बितर हो जाते हैं। कई इलाकों में गोली चलने और विस्फोट जैसी आवाजों की खबरें हैं, हालांकि सरकारी एजेंसियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

जैसे-जैसे प्रदर्शन लंबा खिंचते जा रहे हैं, ईरान के सामने आंतरिक अस्थिरता और बाहरी दबाव दोनों की चुनौती बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार किस तरह हालात को संभालती है और क्या बातचीत या सुधार की कोई राह निकलती है, या फिर टकराव और दमन का यह दौर और तेज होता है। फिलहाल, दो सौ से अधिक मौतों के साथ ईरान का यह संकट न केवल देश के भीतर बल्कि पूरे क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गहरे असर छोड़ता नजर आ रहा है।

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