देश में एलपीजी की संभावित कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को उपभोक्ताओं से घबराकर गैस सिलेंडर की बुकिंग न करने की अपील की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में रसोई गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आम लोगों को अनावश्यक रूप से सिलेंडर बुक कराने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण आपूर्ति को लेकर चिंताएं जरूर बढ़ी हैं, लेकिन भारत की ऊर्जा आपूर्ति फिलहाल सुरक्षित है।
सरकार की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब US–Iran–Israel conflict 2026 के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसी के साथ रणनीतिक समुद्री मार्गों, विशेष रूप से Strait of Hormuz के आसपास सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और भारत के ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है।
सरकारी अधिकारियों ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि भारत के पास फिलहाल पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति उपलब्ध है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समय देश को प्रतिदिन लगभग 55 लाख बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में जो मात्रा उपलब्ध है, वह सामान्य परिस्थितियों में होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली आपूर्ति से भी अधिक है।
अधिकारियों के अनुसार सरकार और तेल कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों को विविध बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी एक क्षेत्र या मार्ग पर निर्भरता कम की जा सके। इसी रणनीति के कारण मौजूदा वैश्विक तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर नहीं पड़ा है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि रसोई गैस के भंडार पर्याप्त हैं और आम नागरिकों को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल जरूरत के अनुसार ही सिलेंडर बुक करें।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। 7 मार्च को एलपीजी की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। राजधानी New Delhi में अब 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये हो गई है। वहीं 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़कर लगभग 1,883 रुपये तक पहुंच गई है, जो हालिया बढ़ोतरी के बाद लागू हुई है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में अस्थिरता का असर घरेलू कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन सरकार द्वारा किए गए वैकल्पिक आपूर्ति प्रबंधों से बड़े संकट की संभावना फिलहाल कम है। अधिकारियों ने भी दोहराया कि भारत ने तेल और गैस के आयात के लिए कई देशों के साथ दीर्घकालिक समझौते किए हैं, जिससे अचानक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी जरूरत पूरी की जा सके।
एलपीजी की आपूर्ति को लेकर पैदा हुई आशंकाओं का असर कुछ शहरों में व्यावसायिक गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है। कई रेस्तरां और छोटे खाद्य व्यवसाय गैस की खपत कम करने के लिए वैकल्पिक उपायों की तलाश कर रहे हैं। कुछ जगहों पर रसोई में कोयले से चलने वाले तंदूर, इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक ओवन का उपयोग बढ़ा दिया गया है ताकि गैस पर निर्भरता कम की जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण कुछ स्थानों पर काले बाजार की गतिविधियां भी बढ़ने लगी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ इलाकों में गैस सिलेंडर 2,800 से 3,000 रुपये तक में बेचे जाने की खबरें सामने आई हैं, जो सरकारी निर्धारित कीमत से काफी अधिक है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का मानना है कि यदि लोग घबराकर बड़ी संख्या में सिलेंडर बुक करने लगते हैं तो इससे वितरण प्रणाली पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। यही कारण है कि प्रशासन लगातार लोगों से संयम बरतने और केवल आवश्यकता के अनुसार ही गैस बुक करने की अपील कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है और उसकी बड़ी आबादी घरेलू रसोई गैस पर निर्भर है। ऐसे में सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि आपूर्ति श्रृंखला सुचारु रूप से चलती रहे और उपभोक्ताओं को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
केंद्र सरकार ने एक बार फिर भरोसा दिलाया है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आम नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और यदि जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त कदम भी उठाए जाएंगे ताकि देश में ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी रहे।






















