मुंबई.महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को स्पष्ट कर दिया है। शुक्रवार को मतगणना पूरी होने के साथ ही यह साफ हो गया कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली महायुति ने राज्य के शहरी सत्ता केंद्रों पर निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बड़ी जीत के बाद महाराष्ट्र की जनता का आभार जताते हुए कहा कि यह विजय महायुति की नीतियों, सुशासन और जनता से मजबूत जुड़ाव का परिणाम है। प्रधानमंत्री ने सोशल माध्यमों के जरिए दिए गए संदेश में कहा कि महाराष्ट्र के लोगों ने विकास, ईमानदारी और स्थिर नेतृत्व को चुना है।महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव 2026 के रुझानों और परिणामों ने राज्य की शहरी राजनीति में बड़ा संदेश दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के नेतृत्व वाली महायुति ने 29 नगर निगमों में जिस तरह से निर्णायक बढ़त बनाई है, उसने सत्तारूढ़ गठबंधन के हौसले बुलंद कर दिए हैं। इन नतीजों के सामने आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जनादेश सुशासन, जनकल्याण और विकास की नीतियों पर जनता के मजबूत विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने इसे राज्य के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत बताया है।
शुक्रवार 16 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच पर अपने संदेश में कहा कि महाराष्ट्र के उत्साही लोगों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के जनकल्याण और अच्छे शासन के एजेंडे को आशीर्वाद दिया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न नगर निगम चुनावों के नतीजे यह दिखाते हैं कि महायुति और महाराष्ट्र की जनता के बीच का रिश्ता और अधिक मजबूत हुआ है। प्रधानमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की खुले दिल से सराहना करते हुए कहा कि यह जीत उनकी मेहनत और जनता से जुड़े रहने का परिणाम है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि यह जनादेश केवल चुनावी जीत नहीं है, बल्कि शासन के अनुभव और विकास के दृष्टिकोण की स्वीकृति है। उन्होंने कहा कि यह समर्थन राज्य की प्रगति को और गति देगा और महाराष्ट्र की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा का उत्सव है। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राज्य भर में पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
चुनावी रुझानों के अनुसार मुंबई महानगरपालिका में महायुति ने बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है। 227 वार्डों में से गठबंधन 125 सीटों पर आगे चल रहा है। भारतीय जनता पार्टी अकेले 96 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और वह देश की सबसे समृद्ध नगर निकाय में सबसे बड़ी पार्टी बनने की ओर अग्रसर है। उसके सहयोगी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 29 सीटों पर आगे है। दूसरी ओर ठाकरे बंधुओं के नेतृत्व वाले दलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट 62 सीटों पर आगे है, जबकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नौ सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। कुल मिलाकर ठाकरे खेमे की अगुवाई लगभग 70 सीटों तक सिमटती नजर आ रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में आयोजित विजय रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि महायुति 29 में से 25 नगर निगमों में सत्ता हासिल करने की ओर बढ़ चुकी है। इनमें मुंबई, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, नागपुर, नासिक और छत्रपति संभाजीनगर जैसे प्रमुख नगर निगम शामिल हैं। फडणवीस ने कहा कि जनता ने महायुति को इसलिए चुना क्योंकि वह पारदर्शिता और विकास चाहती है। उन्होंने इसे राज्य की राजनीति में नए युग की शुरुआत करार दिया और पार्टी कार्यकर्ताओं को इस जीत का असली नायक बताया।
इन चुनावों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह महाराष्ट्र में वर्ष 2017 के बाद हुए पहले नगर निकाय चुनाव थे। सुबह साढ़े सात बजे से शुरू हुआ मतदान शाम साढ़े पांच बजे तक चला और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। शुक्रवार सुबह दस बजे मतगणना शुरू होते ही रुझानों ने स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों का प्रदर्शन विपक्ष से कहीं बेहतर रहने वाला है। देर शाम तक आए आंकड़ों के अनुसार महायुति गठबंधन 1600 से अधिक सीटों पर बढ़त या जीत दर्ज कर चुका था।
मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजे इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। लंबे समय से शिवसेना के एकछत्र वर्चस्व वाली इस निकाय में सत्ता संतुलन बदलता हुआ नजर आया। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन ने यहां मजबूत प्रदर्शन किया, जिससे उद्धव ठाकरे गुट की पकड़ कमजोर होती दिखी। हालांकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के कुछ प्रमुख चेहरे जीत दर्ज करने में सफल रहे। पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर, श्रद्धा जाधव, विशाखा राउत और मिलिंद वैद्य ने अपने-अपने वार्डों से जीत हासिल की, वहीं तीन पूर्व उपमहापौर भी विजयी रहे। यह जीत उस कड़े चुनावी मुकाबले के बीच आई, जिसमें अगले महापौर को लेकर जोरदार राजनीतिक संघर्ष देखने को मिला।
चुनाव प्रचार के दौरान हिंदू-मराठी पहचान का मुद्दा भी प्रमुखता से उभरा। शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी, मनसे और अन्य दलों ने इस भावनात्मक मुद्दे को अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश की। बावजूद इसके, नतीजों से यह संकेत मिला कि शहरी मतदाताओं ने विकास, प्रशासनिक क्षमता और स्थिर सरकार को प्राथमिकता दी।
राज्य के अन्य हिस्सों में भी भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, नासिक, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर में पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की। इन शहरों में पार्टी ने न केवल सीटों की संख्या बढ़ाई, बल्कि विपक्षी दलों के पारंपरिक गढ़ों में भी सेंध लगाई। इसे भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और शहरी मतदाताओं के बीच बढ़ते भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि चुनावी नतीजों के बीच विपक्षी दलों ने परिणामों पर सवाल भी उठाए हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने मतदान प्रक्रिया और मतगणना को लेकर संदेह जताते हुए कथित ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए। उनका कहना है कि चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ दल के बीच मिलीभगत की जांच होनी चाहिए। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार रही।
इस बीच अन्य दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि उनकी पार्टी को भी राज्य के कई हिस्सों में अच्छा समर्थन मिला है। उन्होंने दावा किया कि जनता ने पार्टी के प्रयासों को स्वीकार किया है और यह उनके लिए उत्साहजनक संकेत है। वहीं कांग्रेस ने चंद्रपुर नगर निगम में जीत का दावा करते हुए कहा कि वहां जनता ने भाजपा की नीतियों को नकार दिया है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि पार्टी ने 66 में से 27 सीटें जीतकर ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।
चुनावी माहौल के दौरान कुछ दिलचस्प राजनीतिक घटनाएं भी चर्चा में रहीं। मुंबई में ‘रस मलाई’ टिप्पणी को लेकर उठा विवाद भी चुनावी नतीजों में प्रभावी साबित हुआ। जिस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक कटाक्ष किया गया था, उसी पर प्रचार करने वाले भाजपा नेताओं के समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर ली। इसे भाजपा कार्यकर्ताओं ने आलोचनाओं का करारा जवाब बताया।
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शहरी राजनीति में फिलहाल महायुति का दबदबा कायम है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर मुख्यमंत्री फडणवीस तक, पार्टी नेतृत्व ने इसे जनता के विश्वास की जीत बताया है। वहीं विपक्ष इन नतीजों से सबक लेते हुए अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की बात कर रहा है। यह चुनाव न केवल स्थानीय निकायों की सत्ता तय करेगा, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी राजनीतिक दिशा संकेतक के रूप में देखा जा रहा है।





























