गुरु की चाल बदलेगी तो बाजार में आ सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव, निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह

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ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार मार्च और जून 2026 के बीच का समय आर्थिक गतिविधियों और निवेश बाजार के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। विद्वान ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि गुरु ग्रह की चाल में होने वाला परिवर्तन न केवल व्यक्तिगत जीवन बल्कि व्यापक आर्थिक परिदृश्य पर भी प्रभाव डाल सकता है। वर्तमान में गुरु मिथुन राशि में वक्री अवस्था में संचरण कर रहे हैं, जिसे निर्णयों में भ्रम, योजनाओं में देरी और आर्थिक अस्थिरता का कारक माना जाता है। बाजार विश्लेषकों और ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि 11 मार्च 2026 से गुरु के मार्गी होने के बाद हालात में बदलाव देखने को मिल सकता है।

जानकारी के अनुसार 11 मार्च 2026 को प्रातः 8 बजकर 58 मिनट पर गुरु मार्गी हो जाएंगे। ज्योतिष शास्त्र में गुरु को ज्ञान, विस्तार, निवेश, बैंकिंग, शिक्षा और बड़े आर्थिक निर्णयों का कारक ग्रह माना गया है। वक्री अवस्था में जहां निर्णय प्रक्रिया धीमी पड़ती है और निवेशकों का आत्मविश्वास डगमगाता है, वहीं मार्गी होने पर ठहरे हुए कार्य गति पकड़ते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस अवधि में निवेश, विदेश संबंधी योजनाएं, उच्च शिक्षा, धार्मिक कार्यों और दीर्घकालिक आर्थिक रणनीतियों में स्पष्टता आ सकती है।

पिछले कुछ महीनों में बाजार में देखी गई अनिश्चितता को भी कुछ जानकार गुरु की वक्री चाल से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि वक्री अवस्था में अक्सर बाजार में भ्रम की स्थिति बनती है, जिससे निवेशक भावनात्मक निर्णय ले बैठते हैं। इसके विपरीत, मार्गी गुरु स्थिरता और संतुलन का संकेत देता है। 11 मार्च के बाद निवेशकों के विश्वास में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, जिससे शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है।

ज्योतिषीय आकलनों के मुताबिक जून 2026 में गुरु कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे उनकी उच्च राशि माना जाता है। उच्च का गुरु विशेष रूप से शुभ फल देने वाला माना जाता है। आर्थिक और सामाजिक स्तर पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की बात कही जा रही है। बड़े संस्थानों, बैंकिंग क्षेत्र, वित्तीय संस्थाओं और दीर्घकालिक निवेश योजनाओं में स्थिरता आ सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस दौरान संरचनात्मक सुधार, नई नीतियों की घोषणा या बड़े आर्थिक निर्णयों की पृष्ठभूमि बन सकती है।

हालांकि 11 मार्च से पहले की अवधि को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। ज्योतिषाचार्य पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु, जो मां कामख्या साधक, जन्म कुंडली विशेषज्ञ और वास्तु शास्त्री के रूप में जाने जाते हैं, का कहना है कि वक्री गुरु की अंतिम अवस्था में बड़े निवेश से बचना चाहिए। उनका सुझाव है कि सट्टा, अत्यधिक जोखिम वाले सौदे और भावनात्मक निवेश निर्णय नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। विशेषकर ऊंचे दामों पर सोना-चांदी की खरीदारी को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

आर्थिक संकेतों की बात करें तो 11 मार्च से जून 2026 के बीच शेयर बाजार में सुधार की संभावना जताई जा रही है। निवेशकों का मनोबल बढ़ सकता है और दीर्घकालिक निवेश योजनाओं को गति मिल सकती है। हालांकि कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोने की कीमतों में दबाव बन सकता है, जबकि चांदी में तेज अस्थिरता की स्थिति बन सकती है। कुछ आकलनों में यह भी कहा गया है कि चांदी की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी के बाद अचानक गिरावट की स्थिति बन सकती है, जिसे आम भाषा में ‘गुब्बारा फूटने’ जैसी स्थिति कहा जाता है।

बाजार के जानकारों का मानना है कि ज्योतिषीय संकेतों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरों में बदलाव, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और नीतिगत फैसले भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में निवेशकों को केवल ग्रहों की चाल के आधार पर निर्णय लेने के बजाय संतुलित रणनीति अपनाने की जरूरत है। जोखिम प्रबंधन, विविधीकरण और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना लाभकारी हो सकता है।

फिलहाल निवेशकों और कारोबारियों की नजर 11 मार्च 2026 की तारीख पर टिकी है, जब गुरु मार्गी होंगे। इसके बाद जून में उच्च राशि में प्रवेश के साथ आर्थिक परिदृश्य में नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि विशेषज्ञ बार-बार यह भी दोहरा रहे हैं कि किसी भी निवेश से पहले व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, बाजार की वास्तविक परिस्थितियों और विशेषज्ञ सलाह को ध्यान में रखना आवश्यक है। आने वाले महीनों में गुरु की चाल बाजार में नई हलचल पैदा करती है या नहीं, यह समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल सतर्कता और संयम को ही सबसे सुरक्षित रणनीति माना जा रहा है।

*पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु*(9893280184)

मां कामाख्या साधक जन्म कुंडली विशेषज्ञ वास्तु शास्त्री

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