
पिपरा गांव में कई दिनों से चल रही श्रीमद् भागवत कथा का समापन हो गया। अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का वर्णन किया गया, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। कथा व्यास ने रुक्मिणी जी की अटूट श्रद्धा, श्रीकृष्ण को भेजे गए उनके संदेश और विवाह के लिए श्रीकृष्ण के आगमन का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति और विश्वास से भगवान अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी हरण और विवाह का प्रसंग सुनते ही पंडाल जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी की मनमोहक झांकी भी निकाली गई। सजे-धजे रथ पर विराजमान भगवान की झांकी गांव की प्रमुख गलियों से होते हुए कथा स्थल तक पहुंची। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए और युवाओं ने भक्ति गीतों पर नृत्य कर उत्साह व्यक्त किया। झांकी के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के लिए स्वयंसेवक भी तैनात थे। समापन दिवस पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया। इसमें गांव और आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजकों ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि इस कथा आयोजन का उद्देश्य गांव में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करना था। कथा के समापन के साथ ही पिपरा गांव में आध्यात्मिक ऊर्जा और भाईचारे का संदेश प्रसारित हुआ। श्रद्धालुओं ने ऐसे धार्मिक आयोजनों को भविष्य में भी जारी रखने की इच्छा व्यक्त की। इस पूरे आयोजन ने गांव में भक्ति और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की।










































