हरैया क्षेत्र की रेखा देवी ने अपने पति के निधन के बाद मशरूम उत्पादन के माध्यम से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। पिछले सात वर्षों से वह अकेले ही अपने दो बच्चों, बेटे विनय और बेटी रोशनी, की परवरिश और शिक्षा की जिम्मेदारी निभा रही हैं। रेखा ने मशरूम की खेती को अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाया है। वह इसे वैज्ञानिक तरीके से करती हैं। उनके अनुसार, बीज डालने के लगभग 20 दिन बाद खाद डाली जाती है। इसके बाद हर 5-5 दिन के अंतराल पर कुल तीन बार खाद दी जाती है। लगभग 10 दिनों तक हवा देने के बाद मशरूम निकलना शुरू होता है। रेखा के पास कुल 6 छप्पर (शेड) हैं। प्रत्येक छप्पर से लगभग 15 क्विंटल मशरूम का उत्पादन होता है। इस प्रकार, वह एक बार में कुल 90 क्विंटल मशरूम का उत्पादन करती हैं, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मशरूम निकलने के बाद उन्हें तोड़ा जाता है, काटा जाता है, अच्छी तरह धोकर सुखाया जाता है और फिर 200 ग्राम के पैकेट में पैक किया जाता है। रेखा अगस्त से मार्च तक नियमित रूप से मशरूम की खेती करती हैं, जिससे उन्हें निरंतर आय प्राप्त होती है। रेखा का यह प्रयास न केवल उनके परिवार के लिए आर्थिक सहारा बना है, बल्कि यह क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनका उदाहरण दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है।









































