स्थानांतरित अधिकारी को सौंपी जांच, 5 दिन बाद सुधरा आदेश: महराजगंज में पंचायत भवन अनियमितता की जांच पर उठे सवाल, DM बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं – Maharajganj News

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महराजगंज के निचलौल ब्लॉक स्थित भेड़िया गांव में पंचायत भवन निर्माण और मनरेगा पार्क से जुड़े भुगतान के एक मामले में पंचायती राज विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच के लिए एक ऐसे अधिकारी को नामित किया गया, जिसका महीनों पहले दूसरे जिले में स्थानांतरण हो चुका था। जब यह चूक सामने आई, तो संशोधित आदेश जारी करने में पूरे पांच दिन लग गए। आरोप है कि भेड़िया गांव में राबिश, सेल्ट और मिट्टी भराई जैसे कार्यों के लिए तीन अलग-अलग व्यक्तियों के निजी बैंक खातों में कुल ₹5,09,580 का भुगतान किया गया। यह भुगतान पंचायत भवन निर्माण और मनरेगा पार्क से संबंधित बताया जा रहा है। पंचायत अधिनियम के अनुसार, सरकारी निर्माण कार्यों में भुगतान केवल फर्म, पंजीकृत आपूर्तिकर्ता या अधिकृत एजेंसी के माध्यम से होना चाहिए, लेकिन इस मामले में नियमों की खुली अनदेखी की गई। कुल छह वाउचरों के माध्यम से यह राशि निजी खातों में ट्रांसफर हुई। इसमें 15 अक्टूबर 2024 को मनरेगा पार्क में मिट्टी भराई हेतु ₹1,34,272 प्रदुम्मन धर दुबे के खाते में; 05 मार्च 2023 को पंचायत भवन के लिए ₹80,612 संजय धर दुबे के खाते में; 30 सितंबर 2023 को पंचायत भवन पर मिट्टी भराई के लिए ₹68,627 संजय धर दुबे और ₹68,627 मुकेश धर दुबे के खाते में; तथा 16 जनवरी 2023 को पंचायत भवन पर राबिश, मिट्टी व सेल्ट के लिए ₹79,430 मुकेश धर दुबे और ₹78,012 प्रदुम्मन धर दुबे के खाते में भुगतान दर्शाया गया है। मामला उजागर होने के बाद भी जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने से संदेह गहराता गया। 31 दिसंबर को जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए। इस समिति में डीसी मनरेगा गौरवेंद्र प्रताप सिंह के साथ सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता संजय प्रताप मल्ल को नामित किया गया था। हालांकि, संजय प्रताप मल्ल पहले ही दूसरे जिले में स्थानांतरित हो चुके थे। यह तथ्य 1 जनवरी को सामने आने के बावजूद संशोधन कराने में लापरवाही बरती गई और संशोधित आदेश 6 जनवरी को जारी हुआ। हैरानी की बात यह भी है कि संशोधित आदेश जारी होने से पहले ही 5 जनवरी को डीसी मनरेगा गौरवेंद्र प्रताप सिंह के साथ सहायक अभियंता मन्नू चौधरी मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर चुके थे। ऐसे में डीपीआरओ कार्यालय की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह मात्र प्रशासनिक चूक थी या जांच को टालने की कोशिश। हालांकि, मंगलवार को जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने यह स्पष्ट किया है कि जांच टीम की रिपोर्ट मिलते ही तथ्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियम उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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