महसी क्षेत्र में हरे और फलदार पेड़ों का अवैध कटान लगातार जारी है। लकड़कट्ट ठेकेदार धड़ल्ले से पेड़ों की कटाई कर रहे हैं, जबकि वन विभाग पर इस मामले में निष्क्रियता का आरोप लग रहा है। यह स्थिति पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर सवाल उठा रही है। क्षेत्र में विशेष रूप से आम के पेड़ों का कटान तेजी से हो रहा है। वन विभाग इस मामले में उद्यान विभाग पर जिम्मेदारी डाल रहा है। वन विभाग का कहना है कि उन्हें उद्यान विभाग से जिन पेड़ों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलती है, उन्हीं की कटाई की अनुमति दी जाती है। बृहस्पतिवार शाम को देवरायपुर सड़क के किनारे हरे आम के पेड़ों पर आरा चलता देखा गया। इस संबंध में महसी के वन रेंजर साकिब अंसारी ने बताया कि जो पेड़ फलदार नहीं होते या निष्प्रयोज्य हो जाते हैं, उनकी एनओसी उद्यान विभाग द्वारा दी जाती है, जिसके बाद उन्हें काटने की अनुमति मिलती है। वहीं, जिला उद्यान अधिकारी दिनेश चौधरी ने बताया कि उन्हें केवल वही पेड़ दिखाए जाते हैं जो निष्प्रयोज्य हो चुके होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उद्यान विभाग के पास आमतौर पर दो-तीन या चार पेड़ों से अधिक की अनुमति के आवेदन नहीं आते हैं। जब उनके अधिकारी मौके पर जाते हैं, तो उन्हें केवल उन्हीं पेड़ों को दिखाया जाता है जिनकी एनओसी दी गई होती है। चौधरी ने स्वीकार किया कि इसी की आड़ में एनओसी से अधिक पेड़ काटे जाने की जानकारी अन्य माध्यमों से मिलती है और इसे रोकने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, सवाल यह उठता है कि वन विभाग की जानकारी में लगातार हरे पेड़ों का कटान हो रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। पेड़ काटने से पहले यह शर्त भी होती है कि एक पेड़ काटने पर कम से कम 10 नए पेड़ लगाए जाएं। लेकिन ठेकेदार लगातार हरे पेड़ों को निशाना बना रहे हैं। एक ओर सरकार हर साल पर्यावरण बचाने के लिए पेड़ लगाती है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग पर ठेकेदारों के साथ मिलकर हरे पेड़ों को कटवाने का आरोप है।
महसी में हरे पेड़ों का अवैध कटान जारी: वन और उद्यान विभाग एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी – Mahsi News
महसी क्षेत्र में हरे और फलदार पेड़ों का अवैध कटान लगातार जारी है। लकड़कट्ट ठेकेदार धड़ल्ले से पेड़ों की कटाई कर रहे हैं, जबकि वन विभाग पर इस मामले में निष्क्रियता का आरोप लग रहा है। यह स्थिति पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर सवाल उठा रही है। क्षेत्र में विशेष रूप से आम के पेड़ों का कटान तेजी से हो रहा है। वन विभाग इस मामले में उद्यान विभाग पर जिम्मेदारी डाल रहा है। वन विभाग का कहना है कि उन्हें उद्यान विभाग से जिन पेड़ों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलती है, उन्हीं की कटाई की अनुमति दी जाती है। बृहस्पतिवार शाम को देवरायपुर सड़क के किनारे हरे आम के पेड़ों पर आरा चलता देखा गया। इस संबंध में महसी के वन रेंजर साकिब अंसारी ने बताया कि जो पेड़ फलदार नहीं होते या निष्प्रयोज्य हो जाते हैं, उनकी एनओसी उद्यान विभाग द्वारा दी जाती है, जिसके बाद उन्हें काटने की अनुमति मिलती है। वहीं, जिला उद्यान अधिकारी दिनेश चौधरी ने बताया कि उन्हें केवल वही पेड़ दिखाए जाते हैं जो निष्प्रयोज्य हो चुके होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उद्यान विभाग के पास आमतौर पर दो-तीन या चार पेड़ों से अधिक की अनुमति के आवेदन नहीं आते हैं। जब उनके अधिकारी मौके पर जाते हैं, तो उन्हें केवल उन्हीं पेड़ों को दिखाया जाता है जिनकी एनओसी दी गई होती है। चौधरी ने स्वीकार किया कि इसी की आड़ में एनओसी से अधिक पेड़ काटे जाने की जानकारी अन्य माध्यमों से मिलती है और इसे रोकने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, सवाल यह उठता है कि वन विभाग की जानकारी में लगातार हरे पेड़ों का कटान हो रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। पेड़ काटने से पहले यह शर्त भी होती है कि एक पेड़ काटने पर कम से कम 10 नए पेड़ लगाए जाएं। लेकिन ठेकेदार लगातार हरे पेड़ों को निशाना बना रहे हैं। एक ओर सरकार हर साल पर्यावरण बचाने के लिए पेड़ लगाती है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग पर ठेकेदारों के साथ मिलकर हरे पेड़ों को कटवाने का आरोप है।









































