उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के महसी क्षेत्र में रेहुआ मंसूर इलाके में पिछले कई दिनों से दहशत फैला रहे एक बाघ को शनिवार दोपहर वन विभाग की टीम ने सफलतापूर्वक पिंजरे में कैद कर लिया। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पिछले एक हफ्ते से खौफ के साये में जी रहे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। बाघ के आतंक की शुरुआत सोमवार को हुई थी, जब उसने रेहुआ मंसूर एक सांड का शिकार किया था। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू की, लेकिन बाघ लगभग 72 घंटों तक वनकर्मियों को चकमा देता रहा। वह लगातार अपनी जगह बदलकर गन्ने के खेतों और नदी के कछार में छिप रहा था। बाघ की सटीक लोकेशन न मिल पाने और इलाके की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, बृहस्पतिवार की मध्य रात्रि में दुधवा टाइगर रिजर्व से सुलोचना और डायना नामक दो प्रशिक्षित हथिनियों को कॉम्बिंग के लिए बुलाया गया। इसके साथ ही दुधवा के विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर और कतरनियाघाट वन्यजीव प्रभाग के डॉ. दीपक की विशेष टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाली। शनिवार को बाघ ने अपनी पुरानी जगह रेहुआ मंसूर छोड़कर करीब 500 मीटर दूर आजाद नगर बसौना माफी के पास शरण ली थी। वन विभाग की टीम ने आधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद से झाड़ियों में छिपे बाघ की सटीक लोकेशन ट्रेस की। दोपहर करीब 3:30 बजे, जब बाघ घेराबंदी के बीच फंस गया, तब विशेषज्ञों की टीम ने उसे सटीक निशाना लगाकर ट्रैक्युलाइज किया। बेहोश होते ही उसे सुरक्षित तरीके से पिंजरे में डाल दिया गया। रेंजर शाकिब अंसारी ने बताया कि बाघ का रेस्क्यू पूरी तरह सफल रहा और इस दौरान किसी भी इंसान या जानवर को चोट नहीं आई है। पकड़े गए बाघ को अब आगे की जांच और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए बहराइच डिवीजन ले जाया जा रहा है। इस सफल ऑपरेशन से रेहुआ मंसूर क्षेत्र के ग्रामीणों ने भी राहत महसूस की है।
आजाद नगर में 72 घंटे बाद बाघ पिंजरे में कैद: वनकर्मियों ने सुलोचना-डायना हाथियों की मदद से रेस्क्यू किया – Mahsi News
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के महसी क्षेत्र में रेहुआ मंसूर इलाके में पिछले कई दिनों से दहशत फैला रहे एक बाघ को शनिवार दोपहर वन विभाग की टीम ने सफलतापूर्वक पिंजरे में कैद कर लिया। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पिछले एक हफ्ते से खौफ के साये में जी रहे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। बाघ के आतंक की शुरुआत सोमवार को हुई थी, जब उसने रेहुआ मंसूर एक सांड का शिकार किया था। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू की, लेकिन बाघ लगभग 72 घंटों तक वनकर्मियों को चकमा देता रहा। वह लगातार अपनी जगह बदलकर गन्ने के खेतों और नदी के कछार में छिप रहा था। बाघ की सटीक लोकेशन न मिल पाने और इलाके की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, बृहस्पतिवार की मध्य रात्रि में दुधवा टाइगर रिजर्व से सुलोचना और डायना नामक दो प्रशिक्षित हथिनियों को कॉम्बिंग के लिए बुलाया गया। इसके साथ ही दुधवा के विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर और कतरनियाघाट वन्यजीव प्रभाग के डॉ. दीपक की विशेष टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाली। शनिवार को बाघ ने अपनी पुरानी जगह रेहुआ मंसूर छोड़कर करीब 500 मीटर दूर आजाद नगर बसौना माफी के पास शरण ली थी। वन विभाग की टीम ने आधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद से झाड़ियों में छिपे बाघ की सटीक लोकेशन ट्रेस की। दोपहर करीब 3:30 बजे, जब बाघ घेराबंदी के बीच फंस गया, तब विशेषज्ञों की टीम ने उसे सटीक निशाना लगाकर ट्रैक्युलाइज किया। बेहोश होते ही उसे सुरक्षित तरीके से पिंजरे में डाल दिया गया। रेंजर शाकिब अंसारी ने बताया कि बाघ का रेस्क्यू पूरी तरह सफल रहा और इस दौरान किसी भी इंसान या जानवर को चोट नहीं आई है। पकड़े गए बाघ को अब आगे की जांच और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए बहराइच डिवीजन ले जाया जा रहा है। इस सफल ऑपरेशन से रेहुआ मंसूर क्षेत्र के ग्रामीणों ने भी राहत महसूस की है।










































