बलरामपुर में नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन विभाग ने संभावित हवाई हमलों जैसी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी के लिए ‘ब्लैकआउट ड्रिल’ का आयोजन किया। इस अभ्यास का उद्देश्य प्रशासनिक सतर्कता का परीक्षण करना और नागरिकों को आपातकाल में आत्मरक्षा व सहयोग के लिए प्रशिक्षित करना था। ड्रिल शुरू होते ही सायरन बजा और पूरा क्षेत्र अंधकार में डूब गया। बाजार, सड़कें और आवासीय इलाके एक साथ बंद कर दिए गए। इस ब्लैकआउट का मुख्य उद्देश्य दुश्मन के हवाई हमले की स्थिति में विमानों को लक्ष्य खोजने से रोकना था। अभ्यास के दौरान विभिन्न आपातकालीन परिदृश्यों का अनुकरण किया गया। इसमें सड़क पर लोगों का घायल होना, आग लगना जैसी स्थितियाँ शामिल थीं। एम्बुलेंस और अग्निशमन दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घायलों को अस्पताल पहुँचाया और आग पर काबू पाया। एक ‘मृतक स्थल’ को भी चिन्हित कर उसका स्केच तैयार किया गया। अग्निशमन दल ने आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर आग बुझाने की तकनीक का प्रदर्शन किया। प्राथमिक चिकित्सा दल ने मलबे में फंसे घायलों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल पहुँचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया। नागरिकों को यह भी सिखाया गया कि सायरन बजने पर घबराने के बजाय बंकर, मजबूत इमारत या छत के नीचे सुरक्षित आश्रय कैसे लिया जाए। जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने कहा कि ऐसे अभ्यास न केवल प्रशासनिक तैयारियों को मजबूत करते हैं, बल्कि नागरिकों में आपात परिस्थितियों से निपटने का आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि ब्लैकआउट ड्रिल का उद्देश्य भय फैलाना नहीं, बल्कि जनता को सजग और सक्षम बनाना है। उन्होंने जोर दिया कि आपातकाल में पुलिस, प्रशासन और जनता का समन्वय ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, और बलरामपुर किसी भी आपदा या चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बलरामपुर में 'ब्लैकआउट ड्रिल' का आयोजन:हवाई हमलों जैसी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी परखा
बलरामपुर में नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन विभाग ने संभावित हवाई हमलों जैसी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी के लिए ‘ब्लैकआउट ड्रिल’ का आयोजन किया। इस अभ्यास का उद्देश्य प्रशासनिक सतर्कता का परीक्षण करना और नागरिकों को आपातकाल में आत्मरक्षा व सहयोग के लिए प्रशिक्षित करना था। ड्रिल शुरू होते ही सायरन बजा और पूरा क्षेत्र अंधकार में डूब गया। बाजार, सड़कें और आवासीय इलाके एक साथ बंद कर दिए गए। इस ब्लैकआउट का मुख्य उद्देश्य दुश्मन के हवाई हमले की स्थिति में विमानों को लक्ष्य खोजने से रोकना था। अभ्यास के दौरान विभिन्न आपातकालीन परिदृश्यों का अनुकरण किया गया। इसमें सड़क पर लोगों का घायल होना, आग लगना जैसी स्थितियाँ शामिल थीं। एम्बुलेंस और अग्निशमन दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घायलों को अस्पताल पहुँचाया और आग पर काबू पाया। एक ‘मृतक स्थल’ को भी चिन्हित कर उसका स्केच तैयार किया गया। अग्निशमन दल ने आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर आग बुझाने की तकनीक का प्रदर्शन किया। प्राथमिक चिकित्सा दल ने मलबे में फंसे घायलों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल पहुँचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया। नागरिकों को यह भी सिखाया गया कि सायरन बजने पर घबराने के बजाय बंकर, मजबूत इमारत या छत के नीचे सुरक्षित आश्रय कैसे लिया जाए। जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने कहा कि ऐसे अभ्यास न केवल प्रशासनिक तैयारियों को मजबूत करते हैं, बल्कि नागरिकों में आपात परिस्थितियों से निपटने का आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि ब्लैकआउट ड्रिल का उद्देश्य भय फैलाना नहीं, बल्कि जनता को सजग और सक्षम बनाना है। उन्होंने जोर दिया कि आपातकाल में पुलिस, प्रशासन और जनता का समन्वय ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, और बलरामपुर किसी भी आपदा या चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।






































