परसा तिवारी में श्रीराम कथा:चौथे दिन श्रोता भावविभोर, भक्ति में हुए लीन

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परसा तिवारी के बुढ़िया समय माता मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन रविवार को श्रोता भावविभोर हो गए। कथा व्यास डॉ. विष्णुकांत शुक्ल ने भगवान श्रीराम के जन्म और उनके जीवन चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। डॉ. शुक्ल ने बताया कि भगवान का जन्म असुरों और पापियों का नाश करने तथा धर्म की रक्षा के लिए हुआ था। उन्होंने बाल्यावस्था से ही असुरों का संहार करना प्रारंभ कर दिया था। व्यास जी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन चरित्र अनंत सदियों तक प्रासंगिक रहेगा। राम कथा में पिता, माता और भाई के प्रति प्रभु राम का स्नेह और प्रेम सदा के लिए अमर है। उन्होंने नारद जी के परम कल्याण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि संसार के विषयों से मन हटाकर भगवान की कथा और उनके चरणों में अनुराग रखना चाहिए, तभी जीवन सफल होता है। श्रीराम कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्ति से सरोबोर हो उठा। भगवान श्रीराम के जयकारों से वातावरण गूँज उठा और श्रद्धालु हर्षित होकर नृत्य करने लगे।

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