थाईलैंड की रानी सिनेनाथ बिलासकल्यानी लुम्बिनी पहुंचींं:बुद्ध जन्मस्थली देखी, मायादेवी मंदिर में की विशेष पूजा, आध्यात्मिक यात्रा संपन्न

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थाईलैंड की रानी सिनेनाथ बिलासकल्यानी ने शुक्रवार को भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी का आध्यात्मिक भ्रमण किया। अपनी धार्मिक यात्रा के तहत गुरुवार को लुम्बिनी पहुंचीं रानी ने शुक्रवार सुबह मायादेवी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान पूरे लुम्बिनी क्षेत्र में आध्यात्मिक माहौल देखा गया। मायादेवी मंदिर परिसर में लुम्बिनी विकास कोष के सदस्य-सचिव दीपक श्रेष्ठ, सिद्धार्थनगर नगरपालिका के प्रमुख इस्तियाक अहमद खां और योजना प्रमुख स्मिता भट्ट ने रानी का औपचारिक स्वागत किया। रानी के आगमन के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासनिक अधिकारी तथा सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद रहे। लुम्बिनी भ्रमण के दौरान रानी सिनेनाथ बिलासकल्यानी ने मायादेवी मंदिर में शांति दीप प्रज्वलित किया। उन्होंने लुम्बिनी क्षेत्र के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। रानी ने मंदिर परिसर का भ्रमण कर बुद्ध की जन्मस्थली का अवलोकन किया और विश्व शांति, सद्भाव तथा मानव कल्याण की कामना की। इससे पहले, भारत और नेपाल की धार्मिक यात्रा के तहत थाईलैंड की रानी बुधवार को कुशीनगर पहुंची थीं। कुशीनगर में उन्होंने बुद्ध के महापरिनिर्वाण मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और भगवान बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा पर चीवर अर्पित किया। इस अवसर पर थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री बोर्नवॉर्नसाक भी उनके साथ उपस्थित थे। इस विशेष पूजा में थाईलैंड से आए बौद्ध भिक्षु और बड़ी संख्या में अनुयायी शामिल हुए। अपनी धार्मिक आस्था के अनुरूप, रानी सिनेनाथ बिलासकल्यानी ने उन चार पवित्र स्थलों- बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर और लुम्बिनी—का दर्शन किया, जिनका उल्लेख भगवान बुद्ध ने अपने महापरिनिर्वाण के समय किया था। भारत में दर्शन कार्यक्रम पूरा करने के बाद वे सोनौली सीमा के रास्ते नेपाल पहुंची थीं। लुम्बिनी दर्शन कार्यक्रम के समापन के बाद रानी शुक्रवार दोपहर लगभग दो बजे गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से थाई एयर फोर्स के चार्टर्ड बोइंग-737 विमान से सीधे थाईलैंड के लिए रवाना हो गईं। इस यात्रा को भारत, नेपाल और थाईलैंड के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
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