
घाघरा नदी के ठोकर नंबर 10 से सटे वीडी बंधे के अंदर दशकों से नदी की धारा बहती थी। अब बाढ़ प्रभावित किसानों ने इस क्षेत्र की करीब 100 एकड़ रेतीली जमीन को खेती योग्य बनाकर गेहूं की फसल उगाई है, जिससे बंधे के अंदर हरियाली लौट आई है। यह वही जगह है जहां पहले सरयू (घाघरा) का पानी लगातार बंधे से टकराता रहता था। फसल उगाने वाले बाढ़ पीड़ित किसानों ने बताया कि वे 1972 में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित हुए थे। उस समय उनके गांव जमुवार, जाजूपुर सहित दर्जनों गांव नदी में विलीन हो गए थे। खेत और मकान सब नदी में समाहित हो गए, जिससे हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ था। किसानों के अनुसार, पिछले एक-दो सालों से नदी की धारा दक्षिण दिशा की ओर खिसक रही है। यदि नदी का बहाव इसी दिशा में बना रहता है, तो बंधे के अंदर की और जमीन कृषि योग्य होती जाएगी और नदी अपने मूल स्थान पर भी लौट सकती है। किसान जय प्रकाश तिवारी, जसवंत, प्रमोद और विश्वनाथ ने बताया कि उन्होंने बालू के रेत वाली इस जगह को बहुत मेहनत के बाद कृषि योग्य बनाया है। यह उनके अथक प्रयासों का परिणाम है कि आज यहां गेहूं की फसल लहलहा रही है। माझा क्षेत्र के बाढ़ पीड़ित जय प्रकाश तिवारी, जो जमुवार गांव के मूल निवासी थे, ने बताया कि सैकड़ों बीघा जमीन और घर घाघरा नदी के रौद्र रूप में जलमग्न हो गए थे। वर्तमान में वे शिवपुर माझिलगांव में रहते हैं और सेना से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने बताया कि दुधौरा, जमुवार सिरीक, सिटकहा, जाजूपुर, बघुआपार, सुंगहा और कुमार पुरवा सहित अनेक तटस्थ गांवों के लोगों की जमीनें चार दशक पहले जलमग्न हो गई थीं। उस समय बहुत से लोग बंधे से सटे आसपास के गांवों में बस गए थे, जबकि कुछ लोग अब देश के विभिन्न प्रदेशों या आसपास के जिलों में रहते हैं।




























