
बहादुरपुर विकास क्षेत्र के अगौना स्थित हट्ठी माता मंदिर में वासंतिक नवरात्रि के अवसर पर नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ और संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। यह प्राचीन मंदिर जिला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है और कई जिलों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। अयोध्याधाम से पधारी स्तुति जी द्वारा संगीतमय श्रीराम कथा का वाचन किया जा रहा है, जो महायज्ञ के साथ-साथ चल रही है। नवरात्रि के इन विशेष दिनों में मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सामान्य दिनों में भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्रत्येक मंगलवार को भक्त यहां आकर मन्नतें मांगते हैं। मनोकामनाएं पूरी होने पर श्रद्धालु यहां कथा, भागवत और भंडारे का आयोजन करते हैं। इसके अतिरिक्त, बच्चों के मुंडन संस्कार जैसे अनुष्ठान भी यहां संपन्न कराए जाते हैं। मंदिर के इतिहास के अनुसार, प्राचीन काल में यहां एक पाकड़ के पेड़ के पास देवी मां की एक पिंडी थी, जिसकी स्थानीय लोग पूजा करते थे। लगभग पचास वर्ष पूर्व क्षेत्रीय लोगों के जन सहयोग से इस स्थान पर माता जी का मंदिर निर्मित हुआ। हिंदी साहित्य के प्रख्यात समालोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल भी इसी पाकड़ के पेड़ के नीचे बैठकर लेखन कार्य करते थे। यह मंदिर अगौना गांव के दक्षिण में एक ऊंचे टीले पर स्थित है। मंदिर निर्माण के बाद से क्षेत्रीय लोगों की आस्था निरंतर बढ़ती गई है। अब क्षेत्र के अलावा दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी प्रत्येक मंगलवार को कथा, पूजा-अर्चना, भंडारा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। पिछले कई वर्षों से हर वर्ष चैत्र मास की नवरात्रि में क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ, कथा और विशाल भंडारे का आयोजन होता आ रहा है। मंदिर परिसर में वह प्राचीन पाकड़ का पेड़ और एक यज्ञ मंडप भी बना हुआ है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर में आने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। यज्ञ समिति के अध्यक्ष प्रिंस यादव ने बताया कि उनका परिवार पिछले बीस वर्षों से देवी मां में गहरी आस्था रखता है। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पांच साल पहले उनके भाई को सांप काटने से किडनी खराब हो गई थी और लखनऊ के मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने उपचार में असमर्थता जताई थी, जिसके बाद उन्हें यहां से लाभ मिला।
























