श्रावस्ती में बाल अपराधों पर पुलिस प्रशासन सक्रिय:एएसपी ने गांव-गांव अभियान चलाने के दिए निर्देश

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श्रावस्ती में बाल श्रम, बाल विवाह और बच्चों से जुड़े अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस प्रशासन सक्रिय है।अपर पुलिस अधीक्षक मुकेश चंद्र उत्तम की अध्यक्षता में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) और विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) की मासिक समीक्षा की गई। संबंधित मामलों की गहन समीक्षा जहां बाल श्रम, बाल विवाह, बाल भिक्षावृत्ति, गुमशुदा बच्चों की तलाश और पॉक्सो एक्ट से संबंधित मामलों की गहन समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त, बच्चों के संरक्षण और कल्याण हेतु सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं पर विस्तृत जानकारी साझा की गई। अपर पुलिस अधीक्षक ने महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन, उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने थानों पर नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों, विवेचकों और जनपद में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सामने आने वाली समस्याओं पर भी चर्चा की और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। एएसपी ने सभी बाल कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों को बाल श्रम के खिलाफ चल रही सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करें।इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरतमंद बच्चों तक इन योजनाओं का लाभ पहुंच सके। बाल विवाह की रोकथाम पर विशेष जोर देते हुए, एएसपी ने अधिकारियों को गांव-गांव में चौपाल लगाकर लोगों को बाल विवाह न करने के लिए प्रेरित करने को कहा।उन्होंने ग्राम प्रधानों और क्षेत्र के संभ्रांत व्यक्तियों को भी जागरूक करने का निर्देश दिया। ताकि बाल विवाह की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को सूचित किया जा सके और समय रहते कार्रवाई हो सके। उन्होंने बाल अपराध से जुड़े संवेदनशील मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया। बच्चों को आवश्यक सहायता प्रदान इसके साथ ही, बाल संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त अभियान चलाने और पीड़ित बच्चों को आवश्यक सहायता प्रदान करते हुए उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए गए। अपर पुलिस अधीक्षक ने जोर देकर कहा कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए विद्यालयों, ग्राम पंचायतों और शहरी बस्तियों में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना अत्यंत आवश्यक है। इससे समाज में बाल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा।
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