गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम/पुडुचेरी। असम, केरल और पुडुचेरी में गुरुवार को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। तीनों राज्यों में मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला और मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं। कहीं-कहीं छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण रहा।
चुनाव आयोग के अनुसार, असम में अपराह्न एक बजे तक 59.63 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। राज्य की सभी 126 सीटों के लिए सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ, जो शाम पांच बजे तक चला। दक्षिण सलमारा मनकाचार जिले में सबसे अधिक 65.93 प्रतिशत और कार्बी आंगलोंग में सबसे कम 50.85 प्रतिशत मतदान हुआ। राज्य में 2.50 करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए 28 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनाए गए थे। कुल 722 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।
केरल में भी मतदान को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहा। यहां 140 विधानसभा सीटों के लिए मतदान सुबह सात बजे शुरू होकर शाम छह बजे तक चला। अपराह्न एक बजे तक 49.70 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। एनार्कुलम जिले में सबसे अधिक 52.94 प्रतिशत और कासरगोड में सबसे कम 47.61 प्रतिशत मतदान हुआ। राज्यभर में महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। अधिकांश स्थानों पर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
पुडुचेरी में 30 विधानसभा सीटों के लिए मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ और शाम छह बजे तक चला। यहां अपराह्न एक बजे तक 56.83 प्रतिशत मतदान हुआ था। पुडुचेरी जिले में करीब 57 प्रतिशत और कराईकल में 56 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। हालांकि मन्नादिपेट विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के बाद पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा, लेकिन अन्य स्थानों पर मतदान शांतिपूर्ण रहा।
पुडुचेरी में सत्तारूढ़ राजग और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है। यहां कुल 294 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 40 महिलाएं शामिल हैं। प्रदेश में लगभग 9.44 लाख मतदाता हैं।
तीनों राज्यों में तेज गर्मी के बावजूद मतदाताओं ने उत्साहपूर्वक अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थाएं की थीं, जो काफी हद तक सफल रहीं। अब सभी की नजरें मतगणना पर टिकी हैं, जो 4 मई को होगी। उसी दिन यह तय हो जाएगा कि तीनों राज्यों में सत्ता किसके हाथों में जाएगी।











