रायपुर|असम हो या बंगाल, केरल हो या तमिलनाडु. सियासी दल चुनाव जीतने पूरी ताकत झोंक रहे हैं. बंगाल ने असम के लिए भाजपा ने जहां छत्तीसगढ़ के नेताओं की ड्यूटी लगाई है. वहीं केरल में भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार की कमान संभालें नजर आ रहे हैं. मुख्यमंत्री पिछले दो दिनों से केरल में है. भाजपा प्रत्याशियों के नामांकन दाखिले में शामिल भी हो रहे हैं. उप मुख्यमंत्री अरुण साव असम में 10 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं|
मंत्री ओपी चौधरी को मिली ये जिम्मेदारी
मंत्री ओपी चौधरी भी असम की 10 सीटों की कमान संभाले हुए हैं. जबकि भारतीय जनता पार्टी के संगठन महामंत्री पवन सहाय बंगाल चुनाव में लगभग 50 सीटों पर अपनी पार्टी को जीत दिलाने में लगे हुए हैं. संगठन के अन्य नेताओं को भी अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी सौंप गई है. कांग्रेस की बात की जाए तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल असम चुनाव के ऑब्जर्वर हैं. लगातार में असम में दौरे कर रहे हैं. कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय भी असम चुनाव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं|
चुनाव को लेकर जुबानी जंग भी तेज
इस तरह दोनों ही दलों के नेता अपनी पार्टी के पक्ष में मोर्चा संभाले नजर आ रहे हैं, लेकिन अभी चुनाव को लेकर जुबानी जंग छत्तीसगढ़ में भी तेज होती नजर आ रही है. भाजपा के फायरब्रांड नेता अजय चंद्राकर केरल, बंगाल, असम के चुनाव को देश बचाने वाला चुनाव कार दे रहे हैं. मंत्री टंकराम वर्मा इस चुनाव को बहुत महत्वपूर्ण बता रहे हैं. दूसरी ओर कांग्रेस के तेजतर्रार नेता शिव डहरिया इस बयान पर पलटवार करते नजर आ रहे हैं. शिव डहरिया कहते हैं जिस पार्टी ने कभी देश की आजादी में योगदान नहीं दिया. उसके लिए देश बचाने की बात कहना सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ है|
पती गर्मी में जमकर पसीना भी बहा रहे नेता
छत्तीसगढ़ के सियासी चेहरे बंगाल से लेकर असम तक अपनी-अपनी पार्टियों के पक्ष में मोर्चा संभाले नजर आ रहे हैं. दोनों ही पार्टी के नेताओं ने अपनी साख भी दांव पर लगा दी है. तपती गर्मी में जमकर पसीना भी बहा रहे हैं. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा. छत्तीसगढ़ के नेताओं की मेहनत कितनी रंग लाती है. किसके हिस्से में जीत आती है किसके हिस्से में मायूसी|


















