पहले जो MoU साइन हुए हैं उसमें कितना जमीन पर आया, मुख्यमंत्री बताए.., अखिलेश यादव का यूपी सरकार पर हमला 

    UP: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में निवेश के दावों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले वर्षों में साइन हुए एमओयू में से कितना निवेश वास्तव में जमीन पर उतरा है, यह बताना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि ये निवेश किस इंडस्ट्रियल पॉलिसी के तहत आए हैं और क्या उनका कोई ठोस प्रभाव दिख रहा है। अखिलेश का यह बयान हाल के विदेशी दौरों और निवेश सम्मेलनों के बाद आया है, जहां योगी सरकार ने बड़े-बड़े एमओयू साइन किए हैं।

    अखिलेश का बयान

    अखिलेश यादव ने स्पष्ट रूप से कहा, ‘मुख्यमंत्री जी को यह बताना चाहिए कि पिछले जो एमओयू हुए हैं उसमें कितना इन्वेस्टमेंट जमीन पर आया और किस इंडस्ट्रियल पॉलिसी के तहत आया?’ उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ घोषणाओं और कागजी एमओयू पर जोर दे रही है, जबकि जमीन पर निवेश और रोजगार सृजन की हकीकत अलग है। अखिलेश ने कहा कि असली निवेश से मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार बढ़ता है, जो यूपी में दिखाई नहीं दे रहा। वे अक्सर दावा करते हैं कि योगी सरकार के दावे ‘हवा-हवाई’ हैं और निवेश सिर्फ कागजों तक सीमित है।

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    योगी सरकार के दावे

    योगी आदित्यनाथ सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में 33.5 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन किए थे। हाल के दौरों में भी सिंगापुर, जापान और दावोस 2026 में हजारों करोड़ के एमओयू हुए, जैसे सिंगापुर से 60,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ तक के प्रस्ताव और दावोस में 9,750 करोड़ से 12,000 करोड़ तक के। सरकार का दावा है कि 2017 से अब तक 50 लाख करोड़ से अधिक के प्रस्ताव आए, जिनमें से 20 लाख करोड़ तक जमीन पर पहुंच चुके हैं और कई प्रोजेक्ट्स में उत्पादन शुरू हो गया है। उद्योगों की संख्या 14,000 से बढ़कर 30,000 हो गई है।

    वास्तविकता और आंकड़े

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2018 के निवेश सम्मेलन में 4.28 लाख करोड़ के प्रस्तावों में से 75-80% जमीन पर उतरे। कुल मिलाकर 12 लाख करोड़ तक का निवेश ग्राउंड पर दिख रहा है। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि बड़े एमओयू में से ज्यादातर कागजी रह जाते हैं। अखिलेश यादव ने 2023 में ही कहा था कि 33 लाख करोड़ के एमओयू में निवेशक ‘अनट्रेसेबल’ हैं। हाल के बयानों में भी वे रोजगार सृजन की कमी और किसानों-उद्योगपतियों की चिंता पर जोर देते हैं।

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