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कैसरगंज में डीज़ल संकट, किसान परेशान:कटाई के समय ईंधन की कमी से फसल और सिंचाई प्रभावित


उत्तर प्रदेश के कैसरगंज क्षेत्र में डीज़ल की किल्लत के कारण किसान परेशान हैं। कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलों के बावजूद, ईंधन की कमी से उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। खेतों में गेहूं समेत अन्य फसलें कटाई के लिए तैयार हैं, लेकिन डीज़ल की अनुपलब्धता के कारण कटाई और सिंचाई दोनों प्रभावित हो रही हैं। समय पर फसल न कटने से किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है। किसानों के अनुसार, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और डीज़ल सीमित मात्रा में उपलब्ध है। इससे ट्रैक्टर और हार्वेस्टर जैसे कृषि उपकरण चलाना मुश्किल हो गया है। कई किसानों ने बताया कि घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें पर्याप्त डीज़ल नहीं मिल पा रहा है, जिससे खड़ी फसल के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कैसरगंज में अधिकांश पेट्रोल पंप तेल की कमी के कारण बंद पड़े हैं, जिससे किसान और आम नागरिक दोनों प्रभावित हो रहे हैं। इस स्थिति का किसानों की मेहनत और आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है। इस संबंध में एसडीएम कैसरगंज अखिलेश सिंह ने कहा कि स्थिति सामान्य है। हालांकि, बंद पड़े पेट्रोल पंपों के विषय में उन्होंने जिला पूर्ति अधिकारी से बात करने की बात कही है। स्थानीय प्रशासन द्वारा ईंधन की कमी न होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द डीज़ल की आपूर्ति सुचारू करने की मांग की है, ताकि समय पर फसल की कटाई हो सके और उन्हें नुकसान से बचाया जा सके। प्रताप फ्यूल सेंटर बढ़ोली, कैसरगंज के संचालक संदीप सिंह ने बताया कि उनकी टंकी बंद है। उन्होंने 10 डीज़ल और 10 पेट्रोल की गाड़ियों का ऑर्डर दिया है, लेकिन डिपो से अभी तक सप्लाई नहीं आई है। उन्होंने जल्द आपूर्ति की संभावना जताई। बहराइच के जिला पूर्ति अधिकारी नरेंद्र तिवारी ने कहा कि तेल की कोई किल्लत नहीं है और गाड़ियां समय पर आ-जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पेट्रोल टंकी बंद होने की जानकारी मिली है और इसकी जांच कराई जा रही है। क्षेत्र में डीजल की कमी का असर अब आम लोगों के साथ-साथ किसानों और व्यापारियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अलग-अलग लोगों ने अपनी समस्याएं बताते हुए हालात की गंभीरता जाहिर की है। अभय रूप पाण्डेय ने बताया कि गन्ने के खेत में पानी भरना है, लेकिन डीजल न मिलने से सिंचाई नहीं हो पा रही है, जिससे गन्ना सूखने की स्थिति में पहुंच रहा है। कमलेश गुप्ता ने कहा कि चार पहिया वाहन में मात्र 500 रुपये का ही डीजल मिल रहा है, जिससे रोजमर्रा का काम चलाना मुश्किल हो गया है। ह्रदय राम यादव ने बताया कि गेहूं की फसल कटने को तैयार है, लेकिन डीजल के बिना थ्रेशर और कटाई का काम कैसे होगा, यह बड़ी समस्या बन गई है। वहीं, सुधीर सिंह ने कहा कि डीजल की कमी के कारण व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। सामान की ढुलाई में दिक्कत हो रही है और सीमित मात्रा में ही तेल मिल रहा है, जिससे काम करना मुश्किल हो गया है।

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