Homeदेश (National)पहले 5 और अब 10 दिन की मोहलत, ईरान पर इतना मेहरबान...

पहले 5 और अब 10 दिन की मोहलत, ईरान पर इतना मेहरबान क्यों हैं ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 10 दिन की मोहलत दी है। 6 अप्रैल 2026 तक ईरान के ऊर्जा संयंत्र पर हमला न करने का ऐलान किया है। ट्रंप का दावा है कि ईरानी सरकार के अनुरोध पर उन्होंने यह कदम उठाया है।

ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर लिखा, ‘ईरानी सरकार के अनुरोध के मुताबिक इस बयान का मतलब यह है कि मैं एनर्जी प्लांट को नष्ट करने का समय 10 दिन के लिए सोमवार 6 अप्रैल 2026 को रात 8 बजे ईस्टर्न टाइम तक रोक रहा हूं। बातचीत चल रही है और फेक न्यूज मीडिया और दूसरों के गलत बयान के बावजूद यह बेहद अच्छी चल रही है।’

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21 मार्च को दी पहली मोहलत

पिछले शनिवार यानी 21 मार्च को ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर ईरान ने होर्मुज की खाड़ी से टैंकरों को सुरक्षित रास्ता नहीं देता है तो 48 घंटे के भीतर ही उसके पावर प्लांट को उड़ाना शुरू कर दिया जाएगा। मगर 48 घंटे से पहले ही ट्रंप ने पांच दिन हमला न करने का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान समझौता चाहता है। दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है।

ईरान बोला- कोई बातचीत नहीं हो रही

ट्रंप के दावों के विपरीत ईरान ने किसी भी प्रकार की बातचीत से इंकार किया। पाकिस्तान के माध्यम से ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम प्लान भेजा। जवाब में ईरान ने पांच मांगों वाला पत्र भेज दिया। कई विश्लेषकों ने माना है कि अब भी ईरान और अमेरिका के बीच प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है। शुक्रवार को ही ईरान को मिली पांच दिनों की मोहलत खत्म हो गई।

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10 हजार जवानों की तैनाती करेगा अमेरिका

अब ट्रंप प्रशासन ने 10 दिनों की मोहलत दी है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि ईरान ने अमेरिका से कोई मोहलत नहीं मांगी थी। इस बीच खबर आ रही है कि अमेरिका मध्य पूर्व में 10 हजार से अधिक जवानों की तैनाती करने पर विचार कर रहा है। ईरान पर जमीनी हमले की भी तैयारी है। अमेरिका की सबसे बड़ी टेंशन ईरान का संवर्धित यूरेनियम है। जमीनी हमला करके अमेरिका इस पर अपना कब्जा चाहता है।

ईरान समझौते को बेताब: ट्रंप

ईरान के सख्त लहजे के बाद ट्रंप को भी लगने लगा है कि कोई समझौता होना दूर की कौड़ी है। कैबिनेट बैठक में ट्रंप ने कहा कि वे समझौते की भीख मांग रहे हैं, मैं नहीं। ईरान बेहद बेताब होकर समझौता चाहता है। मुझे नहीं पता कि हम ऐसा कर पाएंगे या नहीं। वे लड़ने में तो अच्छे नहीं हैं, लेकिन बातचीत में माहिर हैं।

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