‘सबको माफ करो, सबसे माफी मांगो, अब जाओ’, हरीश को दिल्ली एम्स लाया गया

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद हरीश राणा को 14 मार्च को दिल्ली के एम्स लाया गया है। दिल्ली एम्स में डॉक्टरों और परिवार के सामने हरीश राणा को जीवन से मुक्त किया जाएगा। हरीश राणा को कभी न ठीक होने वाली बीमारी है, इसी वजह से वह पिछले 13 सालों से वेजिटेटिव स्टेट में थे। पिछले 13 वर्षों से हरीश राणा संघर्ष भरा जीवन काट रहे थे। हरिश को जल्द ही संसार और शारीरिक दर्द से मुक्ति दी जाएगी।

हरीश राणा का परिवार के साथ एक वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में हरीश की बहन उन्हें शहद खिला रहे हैं। इस वीडियो में हरीश की बहन उनसे कहती है कि सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए जाओ। इस वीडियो को देखकर कई लोग भावुक हो रहे हैं। बता दें कि हरीश राणा को इंजेक्शन या दवाई देकर इच्छामृत्यु नहीं दी जाएगी, बल्कि उनका लाइफ सपोर्ट हटा दिया जाएगा, जिससे उनकी प्राकृतिक मृत्यु हो जाएगी।

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मां और बहन समेत पूरे परिवार की आंखें नम

जब हरीश को गाजियाबाद से दिल्ली एम्स ले जाया जा रहा था, तब हरीश की मां, बहन और छोटा भाई भावुक थे। हरीश के पिता अशोक ने कहा, ‘हम सबसे माफी मांगते हैं। ईश्वर ने यह सब हमें देखने के लिए दिया है। आगे हम यही चाहते हैं कि हमारा बेटा जहां भी रहे, जिस परलोक में रहे, हम उसे कभी भूल नहीं पाएंगे। हमारे रिश्तेदारों, डॉक्टरों और कोर्ट के वकीलों ने हमारा बेहद सहयोग दिया है। उसके लिए हम सबके आभारी हैं।’

हरीश का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

हरीश इस समय दिल्ली एम्स में हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में हरीश के साथ उनकी मां और बहन खड़ी दिखाई दे रही हैं। इस वीडियो में हरीश की बहन उन्हें शहद चटा रही है। वीडियो में जहां एक तरफ परिवार हरीश के लिए दुखी है, वहीं दूसरी तरफ इस वीडियो को देखकर कई लोग भावुक हो उठे हैं। एक्स अकाउंट पर कई लोगों ने कमेंट भी किया।

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कपिल गौर ने लिखा, ‘हरीश राणा की कहानी सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं है, बल्कि यह अटूट ममता, धैर्य और मानवीय संवेदनाओं की पराकाष्ठा है। 13 साल एक लंबा अरसा होता है। एक पूरा दशक बीत गया, दुनिया बदल गई, लेकिन उस कमरे में वक्त जैसे ठहर गया था। हरीश को दी जा रही यह विदाई दुखद तो है।’

दूसरे व्यक्ति तनवीर अहमद ने कहा, ‘वाकई मुझे यह दृश्य देखकर रोना आ रहा है। मां-बाप खुद अपने बेटे के लिए मृत्यु मांगकर लाए, कैसा होगा वह पल जब कोर्ट ने आदेश दिया। इच्छामृत्यु शब्द ही बुरा है, लेकिन हरीश भाई का 13 साल का बीता हुआ समय बेहद पीड़ादायक रहा। साथ ही माता-पिता दोनों इस दुख की घड़ी में यह सफर करते रहे।’

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