जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय परिसर में 4 अप्रैल, शनिवार को स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में सीएचओ, एएनएम, आशा और संगिनी कार्यकर्ता अपनी लंबित मांगों को लेकर एकजुट हुए। बकाया भुगतान न मिलने और हाल ही में नौगढ़ व मिठवल ब्लॉकों से 54 लाख रुपये का बजट वापस शासन को लौट जाने से आक्रोशित कर्मियों ने कार्यालय के अंदर फर्श पर बैठकर विरोध जताया। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारी स्वास्थ्य कर्मियों का कहना था कि वे लंबे समय से अपने मानदेय, प्रोत्साहन राशि और विभिन्न योजनाओं के भुगतान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कई कर्मियों का भुगतान महीनों नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित है, जिससे उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि शासन से बजट मिलने के बावजूद स्थानीय स्तर पर लापरवाही के कारण उन्हें उनका हक नहीं मिल पा रहा है। इस मामले की पृष्ठभूमि में हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन हुई एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत नौगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मिठवल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को आशा, संगिनी व अन्य लाभार्थियों के भुगतान के लिए 27-27 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। सीएमओ कार्यालय ने 31 मार्च तक हर हाल में भुगतान सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे, लेकिन दोनों ब्लॉकों में भुगतान नहीं किया गया और पूरी 54 लाख रुपये की राशि शासन को वापस चली गई। इस घटना ने पहले से ही नाराज स्वास्थ्य कर्मियों के आक्रोश को और बढ़ा दिया। सीएचओ गार्गी पांडे ने बताया कि नौगढ़ ब्लॉक में तैनात कर्मियों को वर्ष 2022-23 से लेकर अब तक कई मदों का भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर और व्यक्तिगत रूप से मिलकर समस्या बताई गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। हाल ही में भी बजट आने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया और पैसा वापस चला गया, जो प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है।
एएनएम संगीता ने कहा कि उन्हें पिछले दो वर्षों से टीबीआई, एचआरटी, मोबाइल रिचार्ज और एबीडी जैसे कई मदों का भुगतान नहीं मिला है। यहां तक कि जुलाई 2025 का वेतन भी अब तक लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब शासन से धनराशि प्राप्त हो चुकी थी, तब भी नौगढ़ स्तर पर भुगतान नहीं किया गया, जिससे सभी कर्मचारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक पूरा बकाया भुगतान नहीं किया जाएगा, तब तक वे कार्य बहिष्कार जारी रखेंगी। एएनएम सुनीता ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब वे अपनी समस्या लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचीं तो वहां कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी बात सुनने के लिए मौजूद नहीं था। इससे कर्मचारियों में और अधिक रोष व्याप्त हो गया। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं करता है, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की और कहा कि लापरवाही का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि बकाया भुगतान तुरंत कराया जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने बताया कि शासन से प्राप्त धनराशि समय से संबंधित ब्लॉकों को भेज दी गई थी, लेकिन नौगढ़ और मिठवल के अधीक्षकों तथा ब्लॉक लेखा प्रबंधकों की लापरवाही के कारण भुगतान नहीं किया गया। जिससे 54 लाख रुपये का बजट वापस चला गया। उन्होंने कहा कि मामले में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि स्वास्थ्य कर्मियों के बकाया भुगतान की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न उत्पन्न हो











