शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व विधायकों की पेंशन से जुड़े मामले में अहम आदेश देते हुए विधानसभा सचिव को निर्देश दिए हैं कि पात्र पूर्व विधायकों को उनकी देय पेंशन और बकाया राशि एक माह के भीतर जारी की जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि तय समय के भीतर भुगतान न होने पर बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मामले की सुनवाई के दौरान विधानसभा सचिव की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि राज्य सरकार द्वारा पहले लाया गया वर्ष 2024 का संशोधन विधेयक वापस ले लिया गया है।
इसके बाद विधानसभा ने एक नया संशोधन विधेयक पारित किया है, जिसमें यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई विधायक 14वीं विधानसभा या उसके बाद निर्वाचित होकर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित होता है, तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि यह नया प्रावधान केवल भविष्य के लिए लागू होगा।
अदालत को यह भी बताया गया कि जिन पूर्व विधायकों ने पेंशन के लिए याचिका दायर की थी, वे 12वीं और 13वीं विधानसभा के सदस्य रहे हैं। इसलिए वे नए संशोधन के दायरे में नहीं आते और उन्हें अपने पूर्व कार्यकाल की पेंशन का अधिकार बना रहेगा। अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि नया संशोधन विधेयक अभी राज्यपाल की मंजूरी के लिए लंबित है।
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने विधानसभा सचिव को निर्देश दिए कि संबंधित पूर्व विधायकों को उनकी देय पेंशन और बकाया राशि एक महीने के भीतर जारी की जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में मिलने वाली नियमित पेंशन भी समय पर जारी की जाए। यदि तय अवधि के भीतर बकाया राशि जारी नहीं की जाती है, तो उस पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
इस आदेश के साथ अदालत ने मामले से संबंधित लंबित अन्य आवेदनों का भी निपटारा कर दिया। इस बीच, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भाजपा प्रवक्ता आशीष शर्मा ने कहा कि अदालत के फैसले से स्पष्ट हो गया है कि कानून भविष्य के लिए बनाए जाते हैं, न कि किसी के खिलाफ बदले की भावना से।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने करीब दो वर्षों तक पूर्व विधायकों को परेशान किया और उनकी पेंशन रोकी गई, लेकिन अब अदालत के आदेश से उन्हें न्याय मिला है। आशीष शर्मा ने इसे कानून के शासन और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग का मामला सामने आया था, जब कांग्रेस के छह विधायकों ने भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के बाद भाजपा का दामन थाम लिया था।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इन विधायकों को दल बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया था। इसी घटनाक्रम के बाद प्रदेश सरकार विधानसभा में एक संशोधन विधेयक लेकर आई थी, जिसमें प्रावधान किया गया था कि यदि कोई सदस्य दल बदल के कारण अयोग्य घोषित होता है तो उसे पेंशन का अधिकार नहीं मिलेगा और उसके पहले के विधायक कार्यकाल की पेंशन भी समाप्त कर दी जाएगी।
हालांकि यह विधेयक विधानसभा से पारित होने के बाद राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, लेकिन इसे स्वीकृति नहीं मिली और वापस लौटा दिया गया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने इस विधेयक को वापस ले लिया था।












