Homeदेश (National)RSS काम कैसे करता है और अब इसमें क्या बदलने की तैयारी...

RSS काम कैसे करता है और अब इसमें क्या बदलने की तैयारी हो रही है?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इन दिनों फिर से चर्चा में हैं। 100 साल से ज्यादा पुराना यह संगठन मौजूदा वक्त में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) का ‘दिमाग’ कहा जाता है। चर्चा है कि अब इसी दिमाग में सर्जरी होने वाली है। प्लान यह है कि RSS के सांगठनिक ढांचे में बदलाव किया जाए ताकि यह नए जमाने के हिसाब से काम कर सके। RSS के मुखिया मोहन भागवत ने सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार को अहमियत देने की बात भी कही है। यह भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर संघ के क्षेत्रों, प्रांतों और अन्य छोटी ईकाइयों की संख्या में बदलाव करने की तैयारी चल रही है और जल्द ही इसे अंतिम रूप भी दिया जा सकता है।

हाल ही में मोहन भागवत ने नागपुर में कहा था कि RSS को कई विभागों में बांटकर इसे डीसेंट्रलाइज किया जाएगा। अभी के 46 प्रांतों को 86 संभागों में बांटा जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि संघ के काम करने के तरीके में बदलाव नहीं आएगा। RSS का लक्ष्य है कि ज्यादा लोगों को शाखा जोड़ने के लिए संगठन को अलग तरीके से ढाला जाए और जिम्मेदारी बांटी जाए। इसके लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स से भी बातचीत की जा रही है और सोशल मीडिया के लिए कॉन्टेंट बनाए जा रहे हैं।

क्या है RSS का मकसद?

पिछले साल 100 साल पूरे करने वाला यह संगठन स्वयंसेवकों के सहारे चलता है। हिंदुत्व की विचारधारा पर चलने वाले इस सगंठन का मकसद समाज में जागरूकता और चेतना पैदा करना है ताकि हिंदू समाज के लोग एकजुट रहें और उन्हें कोई नुकसान न पहुंचा सके। RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का कहना था कि संघ का अंतिम मकसद देश के युवाओं के मस्तिष्क को ऐसी दिशा में मोड़ना है जिससे वे अपना पूरा जीवन हिंदू समाज के प्रति समर्पित कर दें क्योंकि बिना उनके देश को नहीं बदला जा सकता है।

यह भी पढ़ें: सेना मेडल से सम्मानित लोगों के लिए रेल यात्रा होगी फ्री, भारत सरकार का बड़ा एलान

बिना किसी रजिस्ट्रेशन के ही कोई भी शख्स स्वयंसेवक बन सकता है। RSS का मानना है कि कोई भी व्यक्ति एक बार शाखा में आ गया तो वह स्वयंसेवक माना जाता है। इन शाखाओं में स्वयंसेवकों को वैचारिक स्तर पर मजबूत बनाया जाता है और शारीरिक कौशलों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इस तरह की 88 हजार से ज्यादा शाखाएं पूरे देश में लगती हैं। बीते कुछ सालों में यह संख्या तेजी से बढ़ी है और बढ़ती जा रही है।

संगठन कैसे काम करता है?

RSS की शुरुआती ईकाई शाखा ही होती है। शाखा में आने वाले लोग स्वयंसेवक कहलाते हैं। इन्हीं में से मुख्य शिक्षक और शाखा कार्यवाह जैसे लोग बनाए जाते हैं। इसके अलावा, बड़ी शाखाओं में गण शिखक और गटनायक भी होते हैं। ये दैनिक शाखाएं के मंडल फिर खंड और फिर जिले से जुड़ी होती हैं। जिले के स्तर पर एक जिला प्रचारक होता है जो पूरे जिले में संघ का मुखिया होता है। RSS में एक शर्त है कि अगर आपको जिला प्रचारक या उससे ऊपर के किसी पद पर जाना है तो आपको आजीवन अविवाहित रहना होगा। इसका लक्ष्य है कि आपको पारिवारिक सुख छोड़कर देश सेवा में खुद को झोंकना होगा।

यह भी पढ़ें: अचानक कांग्रेस से ऑफिस क्यों खाली करवा रही सरकार? नियम जान लीजिए

अब अगर संघ को ऊपर से देखें तो सबसे बड़ा पद सरसंघचालक का होता है। मोहन भागवत लंबे समय से इसी पद पर हैं। सरसंघचालक के बाद सरकार्यवाह होते हैं। संघ का रोजाना का काम सरकार्यवाह ही देखते हैं। मौजूदा वक्त में दत्तात्रेय होसबाले इस पद पर हैं। खुद मोहन भागवत भी कहते हैं कि वह भी वही करते हैं तो दत्तात्रेय होसबाले यानी सरकार्यवाह उन्हें कहते हैं। इन दोनों के अलावा सह-सरकार्यवाह भी होती हैं। इस पद पर एक समय पर एक से ज्यादा लोग भी हो सकते हैं।

क्या बदलने की तैयारी है?

एक संघ को सबसे पहले 11 क्षेत्रों में बांटा गया है। इसी की संख्या 9 करने की तैयारी है। क्षेत्र के बाद आते हैं प्रांत। भले ही देश में 28 राज्य हैं लेकिन RSS ने 46 प्रांत बना रखे हैं। इसकी वजह है कि बड़े राज्यों में कई प्रांत बनाए गए हैं। इनके मुखिया प्रांत प्रचारक होते हैं।

अब संघ प्रांत की जगह संभाग बनाए जाएंगे और इनकी संख्या भी 46 से बढ़ाकर 85 तक की जा सकती है। क्षेत्र और संभाग के बीच प्रदेश स्तर पर भी ईकाई बनाने की तैयारी है लेकिन अभी इसकी संख्या तय नहीं की गई है। माना जा रहा है कि यह संख्या राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या के हिसाब से हो सकती है। इस बदलाव के बाद राज्यों का मुखिया राज्य प्रचार को बनाया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: QS रैंकिंग कैसे बनती है कि भारत के कॉलेज पीछे रह जाते हैं? समझिए फॉर्मूला

इस स्थिति में क्षेत्र प्रचारक के बाद, राज्य प्रचारक, फिर संभाग प्रचारक और फिर जिला प्रचारक आएंगे। राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग विभाग होते हैं जिनके प्रमुख बनाए जाते हैं। उदाहरण के लिए- प्रचार प्रमुख, सेवा प्रमुख, शारीरिक प्रमुख, बौद्धिक प्रमुख, व्यवस्था प्रमुख, संपर्क प्रमुख, प्रचारक प्रमुख आदि।

प्रशिक्षण कैसे होता है?

RSS में समय-समय पर प्राथमिक स्तर से लेकर प्रचारकों तक का प्रशिक्षण होता रहा है। पहली कैंप सिर्फ 7 दिनों का होता है। इसे इनीशियल ट्रेनिंग कैंप यानी ITC कहा जाता है। यह ट्रेनिंग ले चुके लोग कुछ समय के बाद संघ शिक्षा वर्ग यानी 20 दिन की ट्रेनिंग में जाते हैं। फिर 20 दिन की संघ शिक्षा वर्ग द्वितीय और 25 दिन का संघ शिक्षा वर्ग तृतीय होता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments