ईरान बनाम इजरायल-अमेरिका की जंग में जब सीजफायर का एलान हुआ तो लगा सब ठीक होने वाला है। इस सीजफायर के बाद भी लेबनान पर इजरायल की ओर से हमले किए जा रहे हैं। अब पूरे विवाद का केंद्र लेबनान बन गया है। ईरान का कहना है कि समझौता हुआ तो बात हुई थी कि लेबनान पर भी हमला नहीं होगा। दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल का कहना है कि लेबनान को लेकर ऐसा कोई बात ही नहीं हुई थी। दोनों तरफ से अलग-अलग बातें कही जा रही हैं और इजरायल पर हमले जारी हैं। इन हमलों में लेबनान के सैकड़ों लोग मारे गए हैं और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि वह हिजबुल्लाह को तबाह करके ही दम लेंगे।
अब लेबनान की राजधानी बेरूत समेत शहर के कई हिस्सों में लगातार हवाई हमले हो रहे हैं और इन हमलों में लोगों की जान जा रही है। ऐसे में यह हर किसी को चौंकाने वाला है कि आखिर लेबनान ने ऐसा क्या किया है जो इजरायल हमले रोकने को तैयार नहीं है। 2 हफ्ते के सीजफायर का एलान होने के बावजूद इजरायल ने लेबनान को निशाना बनाने का काम जारी रखा है और उसके रुख में थोड़ी भी नरमी नहीं आई है।
लेबनान के पीछे क्यों पड़ा है इजरायल?
अगर आप नक्शे को देखें तो भूमध्य सागर के पूर्वी छोर पर ही इजरायल और लेबनान दोनों बसे हैं। लेबनान उत्तर में है और इजरायल दक्षिण में। इसके चलते लेबनान की दक्षिणी सीमा इजरायल की उत्तरी सीमा से लगी हुई है। इजरायल के अलावा लेबनान की सीमा तीन तरफ से सीरिया से लगती है। इजरायल की मुख्य समस्या हिजबुल्लाह है। मुख्य रूप से लेबनान में केंद्रित एक उग्रवादी गुट हिजब्बुल्ला शिया मुस्लिमों का पॉलिटिकल ग्रुप भी है। पश्चिम के देशों का विरोधी यह संगठन ईरान का प्रॉक्सी माना जाता है। यही वजह है कि ईरान इसे बचाने में लगा है और इजरायल हर हाल में इसे खत्म कर देना चाहता है।
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दशकों से हिज्बुल्ला और इजरायल का टकराव जा रहा है। हमास की तरह ही इजरायल इस संगठन को भी अपना दुश्मन बताता है। साल 2023 में 7 अक्तूबर को जब हमास ने इजरायल पर हमला किया था तब हिज्बुल्ला ने भी उसका समर्थन किया था। तब से ही इजरायल इस संगठन के पीछे पड़ गया है।
नवंबर 2024 में भी इजरायल ने एक सीजफायर किया था जिसमें यह कहा गया था कि वह लेबनान छोड़ देगा। हालांकि, इजरायली सेनाएं अभी भी कई जगहों बनी हुई हैं। उनका कहना है कि हिज्बुल्ला लगातार सक्रिय है इसलिए वे भी हमले कर रहे हैं। हाल ही में जब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को मार डाला गया तब से हिज्बुल्ला ने इजरायल पर हमले शुरू कर दिए। इसी के जवाब में शुरू हुई कार्रवाई को अब इजरायल नहीं रोक रहा है।
हवाई हमलों के अलावा इजरायल ने कई बार अपने सैनिक भी लेबनान की सीमा के अंदर भेजे हैं। ऐसे हमलों के चलते लेबनान में 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं और कम से कम 1530 लोग मारे गए हैं और 4812 लोग घायल हुए हैं।
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इतिहास में छिपी है विवाद की जड़
हालांकि, इजरायल और हिज्बुल्ला की जंग की यह कहानी सिर्फ इस घटना की नहीं है। 1980 के दशक में अपनी शुरुआत से लेकर ही हिज्बुल्ला का टकराव इजरायल से होता रहा है। उस वक्त जब इजरायल ने लेबनान पर कब्जे की कोशिश की थी तब भी हिज्बुल्ला ने ही उसका विरोध किया था। तब से लेकर अब तक ईरान या उसके समर्थक देशों से जब-जब इजरायल टकराता है, हिज्बुल्ला उसका बदला लेने के लिए आ जाता है। हमास के साथी के रूप में काम करने वाला हिज्बुल्ला तब भी सक्रिय हो जाता है जब इजरायल गाजा पर हमले करता है।











