मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब और गहराता नजर आ रहा है। एक तरफ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान समझौते के लिए तैयार है, वहीं दूसरी ओर ईरान की ओर से बेहद सख्त और आक्रामक बयान सामने आया है। ईरान के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक युद्ध खत्म होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है और यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता। इस विरोधाभासी स्थिति ने पूरी दुनिया को असमंजस में डाल दिया है कि आखिर सच्चाई क्या है—शांति की ओर बढ़ते कदम या एक बड़े युद्ध की आहट?
ईरान की सख्त शर्तें और खुली चेतावनी
मोहसेन रेज़ाई ने अपने बयान में तीन मुख्य शर्तों को सामने रखा है—पहला, ईरान को हुए नुकसान का पूरा मुआवजा दिया जाए; दूसरा, उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं; और तीसरा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह गारंटी दी जाए कि भविष्य में अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। इन शर्तों के साथ ही उन्होंने बेहद तीखा बयान देते हुए कहा कि इस बार जवाब ‘आंख के बदले आंख’ नहीं बल्कि ‘सिर के बदले सिर’ जैसा होगा। उनका यह बयान संकेत देता है कि ईरान अब किसी भी हमले का जवाब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक तरीके से देने की तैयारी में है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सेना लगातार ऑपरेशन चला रही है और क्षेत्र में दबाव बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक दी गई है।
इजरायल की भूमिका पर बड़ा आरोप
ईरान ने इस पूरे संघर्ष के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को जिम्मेदार ठहराया है। रेज़ाई का कहना है कि यह युद्ध एक हफ्ते पहले ही खत्म हो सकता था क्योंकि अमेरिका इसके लिए तैयार था, लेकिन नेतन्याहू के दबाव के चलते स्थिति और बिगड़ गई। उनके अनुसार, इजरायल की रणनीति ने हालात को और जटिल बना दिया है और अब यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। ईरान का यह भी दावा है कि अमेरिका अब समझ चुका है कि इस युद्ध में कोई स्पष्ट जीत संभव नहीं है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या वास्तव में यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित रहेगा या पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा।
बातचीत जारी, लेकिन अनिश्चित भविष्य
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका की ओर से ईरान के एक बड़े नेता के साथ बातचीत चल रही है और समझौते की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधियों ने ईरानी पक्ष से संपर्क किया है, हालांकि उन्होंने उस नेता का नाम सार्वजनिक नहीं किया। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद ही इस संघर्ष की शुरुआत हुई थी, जिसने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैला दी। अब जबकि दोनों पक्षों के बयान एक-दूसरे से बिल्कुल उलट हैं, यह साफ नहीं है कि हालात कब तक सामान्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह स्थिति या तो कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ेगी या फिर एक बड़े और खतरनाक टकराव में बदल सकती है।
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