बद्रीपुरवा क्षेत्र में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन कृष्ण-रुक्मिणी विवाह का आयोजन किया गया। कथावाचक पं० राकेश मिश्र जी महाराज ने श्रद्धालुओं को कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई। इस अवसर पर भगवान कृष्ण की बारात निकाली गई। श्रद्धालु झूमते-गाते बारात लेकर निकले, जबकि सखियां रुक्मिणी को मंच पर लेकर आईं। कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने इस विवाह के साक्षी बनकर जमकर पुष्प वर्षा की। विवाह संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं ने कन्यादान कर उपहार भी भेंट किए। कथा व्यास पं० राकेश मिश्र जी महाराज ने बताया कि द्वारिका में रहते हुए भगवान श्रीकृष्ण और बलराम का नाम चारों ओर फैल गया था। विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण के गुणों और सुंदरता पर मुग्ध होकर उन्हें मन ही मन अपना पति मान लिया था। अपने भाई के विरोध के बावजूद रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण से विवाह किया। इस आयोजन में मुख्य यजमान सत्यनारायण, लक्ष्मण चौहान, गोविंद, भरत, रामकेवल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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