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श्री संकट मोचन मंदिर के संगीत समारोह में पहली बार साहित्य कार्यक्रम की भी शुरुआत

वाराणसी । उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी स्थित श्री संकटमोचन मंदिर के वार्षिक संगीत समारोह में पहली बार साहित्य कार्यक्रम की भी शुरूआत हुई। समारोह की पहली निशा सोमवार देर शाम ‘साहित्य मंच’ पर लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी की पुस्तक ‘चंदन किवाड़’ का लोकार्पण कर साहित्य कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मंच पर संगीत, कला और साहित्य का अनूठा संगम देख संगीत रसिक भी गदगद रहे। अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र ने कहा कि संगीत का कार्यक्रम तो यहाँ होता रहा है। लेकिन साहित्य मंच की पहल एक नई शुरुआत है। संगीत और कला को समझने के लिए साहित्य को समझना भी जरूरी है। आज यहाँ संगीत, कला और साहित्य का संगम अनूठा और अद्वितीय है जो आगे से और भी बृहद रूप में आयोजित की जाएगी। पुस्तक के लोकार्पण के बाद लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कहा कि मन के उद्गारों को जब लिखने का प्रण लिया तब बनारस मेरे नज़रों के सामने रहा। मैंने कभी सोचा नहीं था कि श्री संकट मोचन परिसर में साहित्य का मंच बनेगा और साहित्य पर चर्चा होगी। उन्होंने पुस्तक की कुछ पंक्तियों को पढ़कर उसकी मूल भावना को रखा और कहा कि इस सिद्ध स्थल पर अपनी पुस्तक पर चर्चा होते हुए देखना मेरे पिछले जन्म के कर्मो का फल है। भारतीय संस्कृति लोक मंगल में विश्वास करती है।हमने जो कथाओं से सीखा है उसको जीवन से जोड़ने की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता वरिष्ठ कवि प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि चंदन किवाड़ पुस्तक एक सफल कलाकार की नहीं सच्चे कलाकार की स्मृति कथा है। इसका स्वर बहुबचनात्मक है। इसमें एक कथात्मक लय है जिसमें कई अनाम स्त्रियों की पहचान की गई है। स्वागत वक्तव्य में बीएचयू के न्यूरो चिकित्सक प्रो. विजयनाथ मिश्र ने कहा कि भगवान संकट मोचन जी के आशीर्वाद से इस नए कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। युवा कवि व रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल ने कहा कि यह अवसर शुभता का है जिसका आशय है मालिनी अवस्थी। अपने समय की इस अद्वितीय कलाकार को हम दीदी कहकर बुलाते हैं। जो अप्रिय है उसपर ऊँगली रखना लेखक का काम है उसे मालिनी जी बखूबी समझती हैं। मालिनी जी शास्त्र के अदालत में लोक का मुकदमा लड़ती हैं। लड़ते समय वो अपनी संस्कृति को हमेशा साथ रखती हैं। मालिनी जी करुणा के कारणों का खोज करती हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ अमित पांडेय और धन्यवाद यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने किया।

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