नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का बहुप्रतीक्षित कमांडर सम्मेलन 14 से 16 अप्रैल तक नई दिल्ली में आयोजित होगा। भारतीय नौसेना के इस शीर्ष स्तरीय सम्मेलन में राष्ट्रीय समुद्री हितों की सुरक्षा, क्षमता विकास और मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर रणनीतिक तालमेल पर व्यापक समीक्षा की जाएगी। नौसेना भवन में होने वाले इस सम्मेलन को मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण बेहद अहम माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती बहुराष्ट्रीय गतिविधियों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में नौसेना की भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में यह सम्मेलन नौसेना की तैनाती, ऑपरेशनल रणनीति और प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। विशेष रूप से ऑपरेशन‘सिंदूर’ के बाद नौसेना के ऑपरेशनल सिद्धांतों और इंटर-सर्विस तालमेल की समीक्षा भी इसमें की जाएगी।
सम्मेलन के दौरान अनिल चौहान (सीडीएस), गृह सचिव और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। इस दौरान इंटर-ऑपरेबिलिटी, सुरक्षा संरचना और भविष्य की समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित रणनीति पर विचार-विमर्श होगा। नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी ऑपरेशनल कमांडरों के साथ वर्तमान भू-रणनीतिक हालात का आकलन करेंगे। चर्चा में नीले पानी की क्षमता बढ़ाने, प्रशिक्षण, मानव संसाधन प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस और आधुनिक युद्ध तैयारियों पर विशेष जोर रहेगा।
सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा आधारित तकनीक और बिना चालक वाले प्रणालियों के प्रभावी उपयोग पर भी चर्चा होगी। साथ ही स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी रणनीति तय की जाएगी। यह सम्मेलन न केवल नौसेना की मौजूदा तैयारियों का आकलन करेगा, बल्कि भविष्य की समुद्री रणनीति को दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।











