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पीएम मोदी ने संसद से दी खुला चेतावनी, बोले- ‘होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट बिल्कुल बर्दाश्त नहीं..’

पश्चिम एशिया (Middle East) में भड़की जंग की लपटें अब भारत की दहलीज तक महसूस की जा रही हैं। संसद के पटल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शक्तियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) में किसी भी प्रकार की रुकावट या कमर्शियल जहाजों पर हमले भारत को कतई स्वीकार्य नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में जानकारी दी कि युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है और इसके कारण भारत के सामने ‘अकल्पनीय चुनौतियां’ खड़ी हो गई हैं। उन्होंने साफ किया कि भारत शांति का पक्षधर है और संवाद ही एकमात्र रास्ता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के मुद्दे पर भारत कोई समझौता नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

क्यों भारत के लिए यह जंग है ‘इकोनॉमिक शॉक’?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विस्तार से समझाया कि आखिर क्यों इस क्षेत्र में शांति भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ‘ऑक्सीजन’ की तरह है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों, विशेषकर कच्चे तेल और गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। मिडिल ईस्ट न केवल भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, बल्कि यह दुनिया के बाकी हिस्सों के साथ जुड़ने का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि युद्ध लड़ रहे देशों के साथ हमारे गहरे व्यापारिक रिश्ते हैं और वहां होने वाली कोई भी हलचल सीधे भारतीय रसोई और उद्योगों की जेब पर असर डालती है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आती है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, जिसे सरकार किसी भी कीमत पर रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

 सुरक्षा पर पीएम का बड़ा अपडेट

भारत की चिंता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसानी जिंदगियों से जुड़ी है। पीएम मोदी ने सदन को भावुक करते हुए याद दिलाया कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं और वहां की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। इसके अलावा, दुनिया भर के कमर्शियल जहाजों में काम करने वाले ‘क्रू मेंबर्स’ में भारतीयों की संख्या बहुत बड़ी है। युद्ध क्षेत्र में फंसे इन लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने खुलासा किया कि उन्होंने खाड़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो दौर की बातचीत की है, जिन्होंने हर भारतीय की सुरक्षा का पुख्ता भरोसा दिलाया है। भारत ने वहां फंसे नागरिकों की मदद के लिए 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम और इमरजेंसी हेल्पलाइन भी सक्रिय कर दी हैं।

रेस्क्यू मिशन की सफलता 

संकट के इस दौर में अब तक 3.72 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं, जो मोदी सरकार की सक्रियता का प्रमाण है। पीएम ने विशेष रूप से ईरान से लौटे 1000 भारतीयों का जिक्र किया, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र शामिल हैं। शिक्षा के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है; खाड़ी देशों में चल रहे सीबीएसई (CBSE) स्कूलों की कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को फिलहाल रद्द कर दिया गया है ताकि छात्रों की जान को जोखिम में न डाला जाए। प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया कि छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। भारत का यह रुख दिखाता है कि वह युद्ध के दौर में न केवल अपनी सीमाओं की, बल्कि अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करने में भी पूरी तरह सक्षम है।

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