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‘सुरक्षा घटाइए कि चीफ जस्टिस जैसे आम लोग बात कर सकें’, SC ने WB सरकार को फटकारा

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारों को घेरने से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि मालदा में 1 अप्रैल को न्यायिक अधिकारियों को घेरकर उन्हें घंटों तक बंधक बनाए रखा गया। उनकी गाड़ियों पर हमला किया गया। इसे रोकने में राज्य का प्रशासन पूरी तरह फेल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इस मामले में स्थानीय पुलिस की ओर से दर्ज सभी प्राथमिकी (FIR) अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी जाएं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 142 पर जोर देते हुए कहा कि NIA उन अपराधों की भी जांच करेगी जो सामान्य रूप से उसके दायरे में नहीं आते।

NIA को जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर नई FIR दर्ज करने की भी छूट दी गई है। जांच रिपोर्ट कोलकाता की NIA कोर्ट में पेश की जाएगी, लेकिन चार्जशीट दाखिल करने से पहले NIA को सुप्रीम कोर्ट में नियमित स्टेटस रिपोर्ट देनी होगी।

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कोर्ट ने मुख्य सचिव और DGP को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला और डीजीपी सिद्ध नाथ गुप्ता को अदालत ने फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिपोर्ट) के लिए भेजा गया था, लेकिन राज्य ने उन्हें सुरक्षा नहीं दी और कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

हाई कोर्ट से माफी मांगेंगे मुख्य सचिव

मुख्य सचिव को कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखित माफी मांगने का निर्देश दिया। मुख्य सचिव दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में वर्चुअल मीडियम के जरिए पेश हुए थे। चीफ जस्टिस ने उनसे सवाल किया हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन क्यों नहीं आपने उठाया।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?

मुख्य सचिव ने कहा कि वह उस समय दिल्ली में मीटिंग के लिए गए थे और फ्लाइट में थे, इसलिए कॉल उन तक नहीं पहुंची। जस्टिस बागची ने कहा कि हाई कोर्ट प्रशासन और चीफ जस्टिस के लिए क्या आप इतने उदार हो सकते हैं कि मोबाइल नंबर और दूसरी जानकारियां शेयर कर सकें। उन्होंने कहा है कि उनके फोन की कनेक्टिविटी बेहतर है लेकिन सुरक्षा ज्यादा है। फिर जो दिलचस्प बहस हुई, वह सुनने लायक है।

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चीफ सेक्रेटरी ने फिर कहा, ‘कोलकाता से किसी भी अधिकारी ने मेरे फोन पर कोई कॉल नहीं आया था। 1 अप्रैल को मैं एक मीटिंग के लिए दिल्ली आया था। दोपहर 2 बजे से शाम 4.30 बजे तक मैं फ्लाइट में था और शाम तक मेरे पास कोई फोन नहीं आया था।’

जस्टिस बागची:-
पूरी संभावना है कि फोन कॉल शाम को आए होंगे, जब आप दिल्ली की फ्लाइट से उतर चुके थे। अगर आप अपना मोबाइल नंबर और दूसरी जानकारी देने की कृपा करते, तो चीफ जस्टिस और HC प्रशासन के लिए यह बहुत मददगार होता।

चीफ सेक्रेटरी ने जवाब दिया, ‘मैंने मोबाइल नंबर शेयर किया है।’ जस्टिस बागची ने जवाब दिया, ‘यह ज्यादातर बंद रहता है।’

मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ‘यह बंद नहीं रहता, ज्यादातर ऑन रहता है, यह सुरक्षित है और कनेक्टिविटी बेहतर है।’

जस्टिस बागची:-
सुरक्षा इतनी ज्यादा है कि कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस या हाई कोर्ट प्रशासन भी संपर्क नहीं कर पाते। इसलिए कृपया थोड़ा कम करें, जिससे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जैसे आम लोग भी संपर्क कर सकें।

चीफ सेक्रेटरी ने कहा, ‘इस गलतफहमी के लिए माफी मांगते हैं।’ बेंच ने कहा कि आपको हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से माफी मांगनी चाहिए।’

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‘राजनीति का असर, सचिवालय तक दिख रहा है’

CJI ने DGP की भूमिका पर भी सवाल उठाए। वह चीफ सीक्रेटरी के बगल में बैठे नजर आए। उन्होंने फटकारते हुए कहा कि यह आप दोनों की नाकामी है। कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य की नौकरशाही की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं और राजनीति का असर सचिवालय तक दिख रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की कानून व्यवस्था पर नजर

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की सुरक्षा बलों को वापस न लेने का भी निर्देश दिया और कहा कि अगर राज्य अकेले संभाल नहीं पाता तो कोर्ट आगे कदम उठाएगा। यह घटना मालदा के मोठाबाड़ी इलाके में हुई थी, जहां प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दी थीं और न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया था।

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