रूसी क्रूड ऑयल से भरा टैंकर ‘एक्वा टाइटन’ रविवार सुबह न्यू मैंगलुरु पोर्ट पर पहुंच गया। इस जहाज पर कैमरून का झंडा लगा हुआ था और इसने सुबह करीब 11:30 बजे पोर्ट पर लंगर डाला। शिप ट्रैकर मरीन ट्रैफिक के अनुसार, यह टैंकर पहले चीन के लिए जा रहा था लेकिन साउथ चाइना सी में अपना रास्ता बदलकर भारत की ओर मुड़ गया। मार्च के मध्य में यह जहाज दक्षिण-पूर्व एशियाई पानी में था, जहां इसने अचानक यू-टर्न लिया और भारत की तरफ बढ़ा।
यह रूस से क्रूड ऑयल लेकर आया है, जो जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर के एक पोर्ट से लोड किया गया था। जहाज को मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने चार्टर किया है। इसमें लगभग 7.7 लाख बैरल (करीब 1.1 लाख टन) तेल है।
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मंगलौर पोर्ट पहुंचा जहाज
शिपिंग मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने 19 मार्च को बताया था कि यह टैंकर 21 मार्च को न्यू मंगलौर पोर्ट पहुंचेगा। इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही थी और बाद में अपडेट देने की बात कही।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मध्य-पूर्व में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण रास्ते बंद होने से वैश्विक तेल संकट गहरा गया है।
अमेरिका ने कही थी छूट देने की बात
इस संकट के बीच अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह छूट इसलिए दी गई क्योंकि ईरान वैश्विक ऊर्जा को ‘रोकने’ की कोशिश कर रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने कहा कि भारत ‘अच्छा सहयोगी’ रहा है और पहले रूसी सैंक्शन वाले तेल से दूर रहा था, इसलिए अब अस्थायी रूप से अनुमति दी गई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अनुमति के बाद भारतीय रिफाइनरों ने 3 करोड़ बैरल से ज्यादा रूसी तेल खरीदा है।
कई अन्य तेल टैंकर भी पहुंचे
इसके अलावा, हाल ही में भारत में कई अन्य तेल टैंकर भी पहुंचे हैं। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर भारतीय जहाज ‘जग लाडकी’ UAE से मुर्बन क्रूड लेकर पहुंचा। मुंबई में एक लाइबेरिया फ्लैग वाला जहाज ‘शेनलॉन्ग’ सऊदी अरब से होकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरा।
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साथ ही दो भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ और ‘एमटी नंदा देवी’ एलपीजी लेकर भारत पहुंचे। यह सब वैश्विक तेल संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश दिखाता है।
















