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कभी रेमंड साम्राज्य बनाया, कभी बेटे से झगड़ा, विजयपत सिंघानिया की कहानी क्या?

रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम को मुंबई में निधन हो गया। वे 87 साल के थे। परिवार ने एक बयान में इसकी पुष्टि की। उनके बेटे और रेमंड ग्रुप के मौजूदा चेयरमैन गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर उनके निधन की जानकारी दी। परिवार के अनुसार, विजयपत सिंघानिया मुंबई में ही रह रहे थे। रेमंड ग्रुप के प्रवक्ता ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा।

विजयपत सिंघानिया ने 1980 से 2000 तक करीब दो दशक तक रेमंड कंपनी की कमान संभाली। उन्होंने कंपनी को टेक्सटाइल से आगे बढ़ाकर सिंथेटिक फैब्रिक, डेनिम, स्टील, इंडस्ट्रियल फाइल्स और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण से पहले भी यह कंपनी मजबूत स्थिति में थी।

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2000 में हो गए थे रिटायर

2000 में उन्होंने कंपनी की बागडोर अपने बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दी और अपनी पूरी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी भी उन्हें ट्रांसफर कर दी। व्यापार के अलावा विजयपत सिंघानिया एडवेंचर और एविएशन के शौकीन थे। उन्होंने 2005 में 67 साल की उम्र में हॉट एयर बैलून से लगभग 69,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

पद्मभूषण पुरस्कार से हो चुके थे सम्मानित

1988 में उन्होंने लंदन से दिल्ली तक अकेले माइक्रोलाइट विमान से 23 दिनों में उड़ान भरी थी। उनकी एविएशन सेवाओं के लिए भारतीय वायुसेना ने उन्हें 1994 में एयर कमोडोर का सम्मानित रैंक दिया। उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार और तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड भी मिल चुका था।

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बेटे के साथ था कानूनी विवाद

विजयपत सिंघानिया व्यापार और साहसिक क्षेत्र में अपने योगदान के लिए याद किए जाएंगे। कुछ साल पहले पिता-पुत्र के बीच कानूनी विवाद भी हुआ था, जिसे बाद में सुलझा लिया गया था। उनके निधन से कारोबारी जगत में शोक की लहर है।

गौतम सिंघानिया और विजयपत सिंघानिया का झगड़ा क्या था?

विजयपत सिंघानिया ने रेमंड ग्रुप की पूरी कमान और अपनी 37% हिस्सेदारी गौतम को सौंप दी थी। इसके बाद 2017 में विवाद सार्वजनिक हुआ था, जब विजयपत सिंघानिया ने आरोप लगाया था कि गौतम ने उन्हें मुंबई के मालाबार हिल स्थित फैमिली प्रॉपर्टी जेके हाउस के डुप्लेक्स फ्लैट से बाहर निकाल दिया। उन्होंने कई सार्वजनिक इंटरव्यू में यह कहा था कि अपनी सारी संपत्ति बेटों के नाम कभी नहीं करनी चाहिए।

विजयपत का दावा था कि गौतम ने उनसे घर, कार-ड्राइवर जैसी सुविधाएं छीन लीं थीं, अब वह किराए के मकान में रह रहे हैं। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें आर्बिट्रेशन अवॉर्ड का पालन न करने का आरोप लगाया। विजयपत ने बेटे पर लालच और धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। बाद में गौतम सिंघानिया और विजयपत सिंघानिया के बीच सुलह हो गई थी।

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