मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत और अमेरिका के बीच एक अहम बातचीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर हुई इस बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद यह दोनों नेताओं की पहली सीधी चर्चा है। इस बातचीत में क्षेत्रीय स्थिति, शांति बहाली और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया गया। पीएम मोदी ने खुद सोशल मीडिया पर इस कॉल की जानकारी देते हुए बताया कि भारत लगातार शांति और स्थिरता के पक्ष में खड़ा है और हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास का समर्थन करता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना चर्चा का सबसे अहम मुद्दा
इस बातचीत का सबसे अहम बिंदु स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि इस समुद्री मार्ग का खुला और सुरक्षित रहना पूरी दुनिया के लिए जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर ऊर्जा सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। वहीं अमेरिकी पक्ष ने भी इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए इस मार्ग को बाधित न होने देने की जरूरत पर जोर दिया। जानकारी के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को इस मार्ग को खोलने के लिए दी गई समयसीमा को बढ़ाने का फैसला भी लिया है, जिससे तनाव को कुछ समय के लिए कम करने की कोशिश की जा रही है।
जयशंकर की कूटनीति, ऊर्जा संकट पर तेज हुई बातचीत
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता भी तेज हो गई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बात कर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट पर विस्तार से चर्चा की। दोनों नेताओं ने माना कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, खासकर तेल और गैस की आपूर्ति पर। इसके अलावा जयशंकर ने खाड़ी देशों के राजदूतों से भी मुलाकात की और भारत की ऊर्जा जरूरतों के साथ-साथ वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर भी चर्चा की। इस बातचीत में सऊदी अरब, यूएई, कतर जैसे देशों के साथ सहयोग बनाए रखने पर जोर दिया गया।
बढ़ती कीमतें और दुनिया भर में चिंता का माहौल
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों में साफ दिखने लगा है, जहां तेल और गैस की कीमतों में लगातार उछाल दर्ज किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होता है, तो इससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। भारत ने इस पूरे मामले में संतुलित रुख अपनाते हुए साफ किया है कि वह शांति, स्थिरता और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करता रहेगा। पीएम मोदी और ट्रंप की यह बातचीत इसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में हालात काबू में लाए जा सकते हैं।
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